Homeopathy Director Suspended:ट्रांसफर घोटाले में योगी सरकार की बड़ी सख्ती, होम्योपैथी निदेशक प्रो. अरविंद वर्मा निलंबित

Homeopathy Director Suspended: उत्तर प्रदेश होम्योपैथी विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाले पर निदेशक प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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हाइलाइट्स

  • होम्योपैथी निदेशक प्रो. अरविंद वर्मा निलंबित
  • ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाले में बड़ी कार्रवाई
  • योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लागू

रिपोर्ट- आलोक राय 

Professor Arvind Kumar Varma Suspended: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने होम्योपैथी विभाग में हुए ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाले पर बड़ी कार्रवाई करते हुए निदेशक होम्योपैथी प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ के निर्देश पर हुई है, जिन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

ट्रांसफर-पोस्टिंग में भारी गड़बड़ी

प्रो. अरविंद वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और तबादलों में गड़बड़ी की। उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए कुछ अधिकारियों के तबादलों की सिफारिशें कीं। शुरुआती जांच में पता चला कि तबादले नियमों के खिलाफ किए गए और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए हुए।

आयुष विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रो. वर्मा अपने पद की जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे थे। उन्होंने गलत जानकारियां देकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की और उनका काम करने का तरीका बहुत लापरवाह और संवेदनहीन था।

निदेशक को किया गया गाजीपुर के होम्योपैथिक कॉलेज से संबद्ध

राज्य शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार, प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गाजीपुर से संबद्ध कर दिया गया है। उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

निलंबन के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता

निलंबन के दौरान प्रो. वर्मा को आधा वेतन मिलेगा जिसे जीवन यापन भत्ता कहा जाता है, लेकिन उन्हें महंगाई भत्ता (DA) नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें एक लिखित प्रमाण देना होगा कि वे इस समय किसी और नौकरी, व्यापार या पेशे से जुड़े नहीं हैं।

स्टांप विभाग में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

यह पहला मामला नहीं है जब योगी सरकार ने तबादलों में भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाया हो। स्टांप एवं निबंधन विभाग में भी आईएएस समीर वर्मा को 202 उप निबंधकों के तबादले में अनियमितता के कारण महानिरीक्षक (IG) निबंधन के पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया था।

 पारदर्शिता से समझौता नहीं

आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने इस कार्रवाई के बाद स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य और आयुष सेवाओं में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "जो भी अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभ के लिए कार्य करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

मुख्यमंत्री योगी की जीरो टॉलरेंस नीति की बड़ी मिसाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कार्रवाई एक बड़ा संकेत है कि सरकार भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रो. अरविंद कुमार वर्मा द्वारा किए गए प्रयास भी उन्हें बचा नहीं सके और अंततः उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा। 

Chhangur Baba Case: ED-ATS की बड़ी काऱर्रवाई, छांगुर के 14 ठिकानों पर छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग-विदेशी फंडिंग की जांच तेज

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उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण (Illegal Religious Conversion) के आरोपों में घिरे जमालुद्दीन उर्फ छांगुर (Changur) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एटीएस (ATS) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बड़ा शिकंजा कस दिया है। गुरुवार सुबह 5 बजे से ईडी की टीमें बलरामपुर जिले के उतरौला में 12 और मुंबई में 2 स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें 

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