UP में DAP खाद की कालाबाजारी: किसानों से 1350 की बजाय 1600 रुपये वसूल रहे विक्रेता, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं

DAP Black Marketing: UP के संभल में DAP की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। यहां किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।

DAP Black Marketing

रिपोर्ट- दुर्गेश कुमार यादव, संभल संवाददाता

UP DAP Black Marketing: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में DAP Fertilizer की कालाबाजारी का मामला सामने आया है, जहां किसानों से निर्धारित मूल्य 1350 रुपये की बजाय 1600 रुपये वसूले जा रहे हैं।

इस मामले में किसान बजरंगी ने खाद विक्रेता के खिलाफ IGRS पर शिकायत दर्ज कराई है। मामले में किसान ने आरोप लगाया है कि जुनाबई स्थित खाद भंडार में एक कट्टा DAP Fertilizer के लिए उससे 250 रुपये अधिक वसूले गए।

शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं

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शिकायत के बावजूद, जिला कृषि अधिकारी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। किसान ने अपनी शिकायत के समर्थन में वीडियो साक्ष्य भी पेश किए।

लेकिन, इसके बावजूद कृषि विभाग ने खाद विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय शिकायत (DAP Black Marketing) का फर्जी निस्तारण कर दिया। यह आरोप लगाया जा रहा है कि जिला कृषि अधिकारी ने IGRS पर गलत रिपोर्ट लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है।

किसानों को लूट रहे विक्रेता

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इस मामले में योगी सरकार द्वारा IGRS (Integrated Grievance Redressal System) के तहत शिकायतों के समाधान के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी के कारण खाद विक्रेता बेधड़क ओवर रेटिंग कर रहे हैं और किसानों को लूट रहे हैं।

किसानों को आर्थिक रूप से हो रहा नुकसान

किसान बजरंगी ने बताया कि उसने निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने की शिकायत की थी, लेकिन कृषि विभाग ने खाद विक्रेता को बचाने का प्रयास किया।

इस लापरवाही के चलते किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रशासन की उदासीनता के चलते खाद विक्रेता खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है।

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प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

इस घटना (DAP Black Marketing) ने न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि किसानों की स्थिति को भी उजागर किया है, जो पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं ताकि किसानों को राहत मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

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