मोमोज खाने वाले ऐसे भी: 10 महीने में खा गए 1.5 करोड़ के मोमोज, उड़ गए GST ऑफिसर्स के होश, लगाया लाखों का जुर्माना

Uttar Pradesh Prayagraj Momo Shopkeeper GST Evasion Case Update; उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक अनोखा मामला सामने आया है। इसमें एक मोमोज दूकानदार ने 10 महीने में लगभग डेढ़ करोड़ के मोमोज बेच दिए।

Prayagraj Momo Shopkeeper

GST Officers Exposed Momo Shopkeeper: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक अनोखा मामला सामने आया है। इसमें एक मोमोज दुकानदार ने 10 महीने में लगभग डेढ़ करोड़ के मोमोज बेच दिए।

प्रयागराज के सिविल लाइंस के पास एक दूकान पर जब GST अफसरों ने छापेमारी की तो पाया कि दुकानदार बिना रजिस्ट्रेशन कराए करोड़ों का धंधा कर रहा है। सोमवार को स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (SGST) अफसरों ने दुकान की छापेमारी की थी।

छापेमारी में पकड़ी गई दूकानदार की चोरी

आजकल शहर के लोग खूब मोमोज पसंद कर रहे हैं और इसका शानदार उदाहरण प्रयागराज के सिविल लाइंस से सामने आया है।

यहां एसजीएसटी की छापेमारी में खुलासा हुआ है कि एक मोमोज दुकानदार ने एक छोटी-सी दुकान खोलकर लाखों रुपये का मोमोज (Prayagraj Momo Shopkeeper) बेच रहा था।

गौर करने वाली बात ये है कि दुकानदार ने अभी तक एसजीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

जीएसटी अफसरों ने जाँच के बाद दुकानदार के खिलाफ कार्यवाई की और लगभग पाँच लाख का जुर्माना ठोका है।

जोनल कमिश्नर के निर्देश पर मारा गया छापा

बता दें, एसजीएसटी की छापेमारी में दुकानदार की चोरी पकड़ी गई और आरोपी पर पाँच लाख का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि मामले की जाँच अभी चल रही है।

एसजीएसटी के एक अधिकारी के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद और भी उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन लाखों का कर चोरी करने वाले दुकानदारों पर विभाग की नज़र है।

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मामले की जाँच एसजीएसटी के जोनल कमिश्नर मुक्तिनाथ वर्मा के निर्देश पर अपर आयुक्त राजेश सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर शक्ति सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर राजेंद्र यादव, वणिज्य कर अरविंद और राजेश कुमार कर रहे हैं।

कैसे पकड़ी गई चोरी?

मोमोज दुकानदार (Prayagraj Momo Shopkeeper) की चोरी इसलिए आसानी से पकड़ ली गई, क्योंकि दुकानदार ने अपनी दुकान का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था और पर्सनल अकाउंट में ऑनलाउन पेमेंट रिसीव कर रहा था।

इससे जीएसटी अफसरों की नजर दूकानदार के अकाउंट पर पड़ गई, जिसके बाद छापेमारी में दुकानदार दोषी पाया गया।

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