UP Kinnar Akhada Controversy: ममता कुलकर्णी वाले किन्नर अखाड़े में दो फाड़, महामंडलेश्वर टीना मां ने दिया इस्तीफा

UP Kinnar Akhada Controversy: उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड की मेंबर कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां आज सोमवार को नया अखाड़ा बनाकर घोषित कर दिया है। नए अखाड़े का नाम 'सनातनी किन्नर अखाड़ा' रखा गया है।

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UP Kinnar Akhada Controversy

UP Kinnar Akhada Controversy: महाकुंभ में सबसे चर्चित हुए किन्नर अखाड़े में दो फाड़ होने की खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड की मेंबर कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां ने इस्तीफा दे दिया है।

उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड की मेंबर कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां आज सोमवार को नया अखाड़ा बनाकर घोषित कर दिया है। नए अखाड़े का नाम 'सनातनी किन्नर अखाड़ा' रखा गया है। इस पर बात करते हुए  किन्रर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि हमें इस नए अखाड़े की कोई जानकारी नहीं है। मीडिया से हमें इसका पता चला है आगे अगर कोई जानकारी आएगी तो साझा करेंगे।

टीना मां ने बनाया नया ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा

प्रयागराज में  टीना मां (Tina Maa) ने बताया कि उन्होंने नया संगठन ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा (Sanatani Kinnar Akhada)’ बनाया है। टीना मां पहले किन्नर अखाड़ा (Kinnar Akhada) की महामंडलेश्वर थीं, लेकिन अब उन्होंने पुराना अखाड़ा छोड़ दिया है। उनका कहना है कि पुराने अखाड़े की विचारधारा उस राह से भटक गई, जिसके लिए वह बना था। टीना मां ने कहा-कि “मैं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर रही हूं। लेकिन अखाड़ा अब उस रास्ते से भटक गया है जिसके लिए इसे बनाया गया था। हमारी विचारधारा अब वहां नहीं मिलती, इसलिए मैंने अलग राह चुनी।”

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सनातन धर्म को सशक्त करने का लक्ष्य

टीना मां का कहना है कि उनके नए अखाड़े का मकसद सनातन धर्म को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य स्पष्ट है, हम सनातन को और विस्तार देंगे, चाहे इसके लिए हमें किसी भी कठिनाई का सामना क्यों न करना पड़े।”उन्होंने यह भी कहा कि “यदि धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान की आहुति भी देनी पड़े, तो पीछे नहीं हटेंगे।”

 महाकुंभ से शुरू हुआ अंदरूनी विवाद

महाकुंभ के दौरान ही किन्नर अखाड़े में मतभेद की शुरुआत हुई थी। प्रयागराज के सेक्टर-16 में स्थित किन्नर अखाड़ा, आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी  के नेतृत्व में चल रहा था। टीना मां और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के बीच महाकुंभ के समय से ही विचारों में मतभेद उभरने लगे थे, और धीरे-धीरे यह विवाद गहराता चला गया। सूत्रों के अनुसार, अखाड़े के धार्मिक कार्यक्रमों और विचारधारा को लेकर दोनों के बीच दूरी बढ़ गई थी।

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