UP News: झांसी में एम्बुलेंस चालक ने लावारिस शव को पीठ पर लादकर पहुंचाया श्मशान, वीडियो वायरल, प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

Jhansi Ambulance Driver Video: उत्तर प्रदेश के झांसी में एम्बुलेंस चालक ने लावारिस लाश को पीठ ने लादकर श्मशान घाट पहुंचाया। ड्राइवर ने बताया “जब चार लोग नहीं मिलते और शव सड़ने लगता है, तो हम खुद ही अंतिम संस्कार कर देते हैं।”

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रिपोर्ट- अमित रावत

हाइलाइट्स

  • झांसी में शव को पीठ पर ढोता दिखा एम्बुलेंस चालक
  • लावारिस शव का अमानवीय अंतिम सफर हुआ वायरल
  • मेडिकल प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

Jhansi Ambulance Driver Video: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक बार फिर इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पूरे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक एम्बुलेंस चालक को लावारिस शव को पीठ पर लादकर श्मशान घाट तक ले जाते हुए देखा जा सकता है।

यह हैरान कर देने वाला वीडियो झांसी के बड़ागांव गेट के बाहर स्थित मुक्तिधाम का है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एम्बुलेंस में शव लेकर आए चालक ने जब वहां किसी को मदद के लिए नहीं पाया, तो शव को खुद अपनी पीठ पर लाद लिया। शव का सिर नीचे और पैर ऊपर लटकते हुए करीब 50 मीटर तक उसे श्मशान तक ढोया गया।

शव सड़ने लगा तो खुद किया अंतिम संस्कार

एम्बुलेंस चालक मुकेश यादव ने बताया कि यह शव लावारिस था और कोई भी उसके अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने बताया, “जब चार लोग नहीं मिलते और शव सड़ने लगता है, तो हम खुद ही अंतिम संस्कार कर देते हैं।”

मेडिकल कॉलेज और प्रशासन सवालों के घेरे में

यह घटना झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ी है, जहां से शव को मुक्तिधाम लाया गया। वीडियो के सामने आने के बाद मेडिकल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

पोस्टमार्टम हाउस के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेश गुप्ता का कहना है कि “पोस्टमार्टम के बाद शव पुलिस को सौंप दिया जाता है, इसके बाद की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।” हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद भी उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि “मेरे संज्ञान में ऐसा कोई वीडियो नहीं आया है।”

जनता में आक्रोश, जवाबदेही की मांग

वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि जब लावारिस शवों के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है, तो ऐसे शवों का मानवीय तरीके से अंतिम संस्कार कैसे सुनिश्चित होगा? यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन और नोडल अधिकारी केवल वीडियो वायरल होने का इंतजार करते हैं, या proactive होकर ऐसे मामलों को रोकने का कोई प्रयास करते हैं?

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