200 crore GST officers Scam: यूपी में 50 GST अफसरों के नाम अरबो की बेनामी जमीन, बिल्डर के जरिये रकम खपाने की कोशिश

200 crore GST officers Scam: यूपी में जीएसटी विभाग के अफसरों ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लखनऊ के मोहनलालगंज और सुल्तानपुर रोड की जमीनों में खपाने के दस्तावेज मिले हैं।

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हाइलाइट्स

  • यूपी जीएसटी अफसरों की 200 करोड़ की बेनामी जमीन
  • मोहनलालगंज-सुल्तानपुर रोड में खपाई गई अकूत दौलत
  • 50 से ज्यादा अफसर जांच के घेरे में, 11 के नाम उजागर

200 crore GST officers Scam: उत्तर प्रदेश में स्टेट जीएसटी (State GST) विभाग के अफसरों की अरबों रुपये की नामी-बेनामी जमीन खरीद का बड़ा मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन खरीद के दस्तावेज मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह रकम लखनऊ के मोहनलालगंज और सुल्तानपुर रोड इलाके में एक चर्चित बिल्डर के जरिये खपाई गई।

सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में 50 से ज्यादा जीएसटी अफसर शामिल हैं। इनमें से अब तक 11 अफसरों के नाम सामने आ चुके हैं, जिन्होंने करोड़ों रुपये की जमीन खरीदी है। अफसरों की यह खरीदारी सीधे शासन की नजर में आ चुकी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

कैसे हुआ जमीन खरीद घोटाले का खुलासा?

अवध के एक जिले के चर्चित बिल्डर के जरिये अफसरों ने करोड़ों की रकम जमीनों में खपाई।

मामला शासन तक पहुंचने पर रजिस्ट्री ऑफिस से जमीनों के पंजीकरण प्रपत्रों की कॉपियां निकलवाई गईं।

प्राथमिक जांच में शिकायतें सही पाई गईं, जिसके बाद शासन ने विस्तृत जांच के आदेश दिए।

किन अफसरों पर लगा है जमीन खरीद का आरोप?

जांच में यह खुलासा हुआ कि जिन अफसरों ने जमीन खरीदी है, वे सचल दल (Mobile Squad) और विशेष जांच विंग (SIB) में तैनात रहे हैं या पहले रह चुके हैं।

अफसरों का स्तरजिलों में तैनाती
सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner)सहारनपुर, लखनऊ, आजमगढ़
उपायुक्त (Deputy Commissioner)लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, कानपुर
संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner)वाराणसी, मेरठ, गौतमबुद्धनगर
अपर आयुक्त (Additional Commissioner)गाजियाबाद, आगरा, मुरादाबाद

अधिकांश अफसर गाजियाबाद, आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ और गौतमबुद्धनगर जैसे जिलों में मलाईदार पदों पर तैनात रहे।

कोरोना काल बना अफसरों के लिए ‘कुबेर काल’

विभागीय सूत्रों ने बताया कि कोरोना काल (2020-2022) इन अफसरों के लिए ‘कुबेर काल’ साबित हुआ।

उस दौरान अफसरों का तीन साल तक ट्रांसफर नहीं हुआ।

कई अफसर एक ही जगह पांच साल तक जमे रहे।

इस अवधि में अफसरों ने बेहिसाब पैसा कमाया।

कमाई गई अकूत दौलत को छिपाने के लिए चर्चित बिल्डर के जरिये जमीन में निवेश किया गया।

बिल्डर और अफसरों की मिलीभगत

सूत्रों के अनुसार, जिस बिल्डर ने अफसरों की रकम जमीन में खपाई, वह विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी का करीबी रिश्तेदार है। इसी रिश्ते के कारण बिल्डर ने विभाग में गहरी पैठ बनाई और अफसरों को काले धन (Black Money) को खपाने का रास्ता दिया।

जांच की मौजूदा स्थिति

अब तक 200 करोड़ रुपये की जमीन खरीद के दस्तावेज मिले हैं।

11 अफसरों के नाम साफ तौर पर सामने आ चुके हैं।

शासन ने रजिस्ट्री ऑफिस से सभी कागजात निकलवाने का आदेश दिया है।

आगे और अफसरों के नाम सामने आने की संभावना है।

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