UP News: पूर्व एसीपी मोहसिन खान के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, कहा- यौन संबंध कदाचार की श्रेणी में नहीं आता

ACP Mohsin Khan Case: कानपुर के पूर्व एसीपी मोहसिन खान के निलंबन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यौन संबंधों को सेवा नियमावली में कदाचार नहीं माना गया है।

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हाइलाइट्स

  • एसीपी मोहसिन खान के निलंबन पर हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक।
  • कोर्ट ने माना यौन संबंध सेवा नियमों में कदाचार की श्रेणी में नहीं।
  • राज्य सरकार को जवाब के लिए 4 हफ्ते का समय, अगली सुनवाई 28 जुलाई।

ACP Mohsin Khan Case Updates: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कानपुर में तैनात रहे पूर्व एसीपी मोहसिन खान के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने यह आदेश मोहसिन खान की सेवा संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 28 जुलाई तय की है।

नियमावली में नहीं है यौन संबंध को कदाचार

मोहसिन खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता लालता प्रसाद मिश्रा ने दलील दी कि शादीशुदा होने के बावजूद किसी अन्य महिला से शारीरिक संबंध बनाना उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली के तहत कदाचार नहीं माना गया है। उन्होंने कहा कि नियम 29 केवल दूसरी शादी को कदाचार की श्रेणी में रखता है, न कि शारीरिक संबंधों को।

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IIT छात्रा ने दर्ज कराई थी FIR

बता दें कि मोहसिन खान पर आईआईटी कानपुर की एक छात्रा ने कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि मोहसिन खान ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही आरोप पत्र दाखिल करने पर रोक लगा चुकी है।

बिना विचार के निलंबन की संस्तुति का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एडीजीपी ने 6 मार्च 2025 को बिना स्वतंत्र रूप से विचार किए निलंबन की संस्तुति कर दी। उनका कहना था कि महज यौन संबंध के आरोप पर निलंबन अनुचित और नियमों के विरुद्ध है।

हाईकोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया मजबूत तर्क

न्यायालय ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की दलील से सहमति जताते हुए निलंबन पर रोक लगा दी है और मामले पर विस्तृत जवाब के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।

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