Allahabad High Court: सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति के मुआवज़े की गणना बेटे की अनुकंपा सैलरी से नहीं होगी

Allahabad High Court Road Accident Compensation Case Update: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मारे गए कर्मचारी के मुआवज़े से जुड़ा अहम फैसला सुनाया है

UP Allahabad High Court Road Accident Compensation Son Salary MACT

हाइलाइट्स

  • हाईकोर्ट ने कहा, अनुकंपा नौकरी के बेटे की सैलरी से मुआवजा नहीं तय होगा।
  • मुआवज़ा मृतक की अंतिम सैलरी पर आधारित होगा, न कि बेटे की तनख्वाह पर।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीएसआरटीसी की अपील खारिज कर मुआवज़ा बढ़ाया।

Allahabad High Court MACT Appeal: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी की मौत सड़क हादसे में हो जाती है और उसके बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलती है। तो बेटे की तनख्वाह को मुआवज़ा तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। मुआवज़े की गणना मृत व्यक्ति की असली तनख्वाह के हिसाब से ही होनी चाहिए, खासकर अगर वह अपनी नौकरी के आखिरी दौर में था।

कैसे हुआ हादसा? 

उत्तर प्रदेश विद्युत निगम में जूनियर इंजीनियर के पद पर काम कर रहे प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी। वे बस से उतर रहे थे, तभी उनका पैर फंस गया और ड्राइवर ने बिना देखे बस चला दी। इससे उन्हें गंभीर चोट लगी और अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

UPSRTC ने किया घटना से इनकार

हादसे के बाद मृतक के परिवार ने मुआवज़े के लिए दावा किया। लेकिन यूपीएसआरटीसी (उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम) ने कहा कि वह बस उस रूट पर चलती ही नहीं थी और मृतक के पास से कोई टिकट भी नहीं मिला। इसलिए उन्होंने हादसे को मानने से इनकार कर दिया।

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ट्रिब्यूनल ने बेटे की तनख्वाह को मुआवज़े का आधार बनाया

न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने अपने फैसले में मृतक के बेटे की तनख्वाह (₹20,000 महीना) को मुआवज़ा तय करने का आधार बनाया। उसने यह मान लिया कि मृतक की असली सैलरी (₹54,143) साबित नहीं की जा सकी। इसी के आधार पर परिवार को ₹12,85,000 (6% सालाना ब्याज के साथ) का मुआवज़ा दिया गया। इस फैसले को दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने कहा – यह तरीका गलत है

जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा कि बेटे की तनख्वाह को आधार बनाना पूरी तरह से गलत और गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि मृतक अपनी नौकरी के आखिरी चरण में था और उसकी सैलरी ज्यादा थी, जबकि उसका बेटा अभी नौकरी की शुरुआत में है। दोनों की तनख्वाह की तुलना करना ठीक नहीं है।

असली वेतन के आधार पर मिलेगा ज्यादा मुआवज़ा

कोर्ट ने कहा कि मुआवज़े की गणना मृतक की अंतिम सैलरी (₹54,143) के आधार पर ही होनी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने UPSRTC की अपील को खारिज कर दिया और मृतक के परिवार को ज़्यादा मुआवज़ा देने का आदेश दिया।

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