Uma Bharti Birthday: साध्वी से CM तक का सफर, केवल छठी कक्षा तक पढ़ीं लेकिन महाकाव्यों की हैं अच्छी जानकार

Uma Bharti

भोपाल। मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती आज अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं। उनका जन्म 3 मई, 1959 को टीकमगढ़, मध्यप्रदेश के एक लोधी राजपूत परिवार में हुआ था। इनका पूरा नाम उमा श्री भारती है और उनके समर्थक उन्हें दीदी के कह कर बुलाते हैं। महाकाव्यों की अच्छी जानकार उमा भारती ने साध्वी के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। उनका पालन-पोषण ग्वालियर की तत्कालीन राजमाता विजयराजे सिंधिया ने किया था।

धार्मिक विषयों में काफी पकड़ रखती हैं

केवल छठी कक्षा तक पढ़ी उमा भारती धार्मिक विषयों में काफी पकड़ रखती हैं। राजनीतिज्ञ और हिंदू धर्म प्रचारक होने के अलावा उमा भारती एक समाज सेवी भी हैं। संघ परिवार से जुड़े होने के कारण उमा भारती बचपन से ही हिंदू धार्मिक ग्रंथों और महाकाव्यों में रुचि लेने लग गई थीं।

उमा भारती का राजनैतिक सफर

उमा भारती का राजनैतिक सफर कम उम्र में ही शुरू हो गया था। क्योंकि उनका संबंध सिंधिया परिवार से था। भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के बाद उमा भारती 1984 में पहली बार चुनाव लड़ीं, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 1989 के चुनावों में वे जीत गई। इसके बाद साल 1991 में पार्टी ने उन्हें खुजराहो लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वह जीतकर संसद पहुंची। उमा इस सीट को जीतकर लगातार तीन बार संसद भवन पहुंची। इसके बाद उन्होने साल 1999 मं भोपाल सीट से चुनाव लड़ा और यहां से भी उन्होंने जीत हालिल की।

साल 2003 मप्र की मुख्यमंत्री बनीं

उमा भारती, वाजपेयी सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में रहीं। जैसे मानव संसाधन विभाग, पर्यटन, खेल और युवा मामले, कोयला और खाद्यान्न मंत्रालय का पदभार उन्होंने संभाला। इसके बाद साल 2003 वे मध्य-प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। कहा जाता है कि उनके अथक प्रयासों की वजह से ही भारतीय जनता पार्टी को मध्य-प्रदेश में तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त हुआ था। लेकिन वो इस पद पर ज्यादा दिन नहीं रहीं। क्योंकि उनके नाम से कर्नाटक में एक वारंट जारी हो गया था और इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

बीजेपी छोड़ने के बाद अपनी खुद की पार्टी बनाई

उमा भारती ने इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ गलत बयान दिए थे। इस कारण से उन्हें तब पार्टी से निलंबित भी कर दिया गया था। निलंबित होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई जिसका नाम था ‘भारतीय जनशक्ति दल’। हालांकि उनकी पार्टी आगामी चुनावों में कोई कमाल नहीं कर पाई।

विवाद में जुड़ता रहा है नाम

उमा भारती का नाम विवादों में हमेशा जुड़ता रहा है। यही कारण है कि उन्हें बीजेपी से दो बार निलंबन भी किया गया है। सबसे पहले नवंबर 2004 में पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के विरोध में टेलीविजन पर बयान देने के लिए और दूसरी बार 2005 के अंत में पार्टी द्वारा शिवराज सिंह को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री निर्वाचित करने पर उन्होंने फिर भड़काऊ बयान दिए, जिसके कारण उन्हें एक बार फिर निलंबन का सामना करना पड़ा था।

भारतीय जनता पार्टी में वापसी

पहली बार जब उन्हें साल 2004 में निलंबित किया गया था। तब RSS के दखल के बाद कुछ ही महीनों में पार्टी में शामिल करवा लिया गया था। लेकिन दूसरी बार 2005 के अंत में जब उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था, तो करीब छ: साल बाद 2011 में उनकी वापसी भारतीय जनता पार्टी में हुई।

उमा भारती का योगदान

विवादों के अलावा अगर उनके योगदान की बात करें तो। राम जन्म भूमि को बचाने के लिए उमा भारती ने कई प्रभावकारी कदम उठाए। उन्होंने पार्टी से निलंबन के बाद, भोपाल से लेकर अयोध्या तक की कठिन पद-यात्रा की। साध्वी ऋतंभरा के साथ मिलकर अयोध्या मसले पर उन्होंने आंदोलन शुरू किया। उमा भारती ने इस आंदोलन को एक सशक्त नारा भी दिया- राम-लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। जुलाई 2007 में रामसेतु को बचाने के लिए, उमा भारती ने सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट के विरोध में 5 दिन की भूख-हड़ताल भी की। हिंदू धर्म से संबंधित अच्छी जानकारी और रुचि होने के कारण उमा भारती ने अपने विचारों को किताबों में संग्रहित किया है। उनकी अब तक तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

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