ब्रिटेन की न्यायाधीश ने विकीलीक्स के संस्थापक असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित करने से इनकार किया

(अदिति खन्ना)

लंदन, चार जनवरी (भाषा) ब्रिटेन की एक न्यायाधीश ने ‘विकीलीक्स’ के संस्थापक जूलियन असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की इजाज़त देने से इनकार करते हुए सोमवार को कहा कि उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें अमेरिका के हवाले करना उनके साथ “अत्याचार’’ होगा।

अमेरिका ने एक दशक पहले खुफिया सैन्य और राजनयिक जानकारियां प्रकाशित करने को लेकर असांजे के खिलाफ जासूसी के 17 आरोप लगाए थे। इन्हीं आरोपों के सिलसिले में लंदन की ओल्ड बेली अदालत में प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई चल रही थी।

जिला न्यायाधीश वैनिसा बराइटसेर ने सोमवार को कहा कि अगर असांजे को अमेरिका भेजा जाता है तो वह खुदकुशी कर सकते हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि हताश व्यक्ति अपने भविष्य को लेकर आशंकित रहता है।

अमेरिकी सरकार ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी और उसके पास अपील दायर करने के लिए 14 दिन हैं। इसका मतलब है कि असांजे को लंदन की बेलमार्श जेल से रिहा नहीं किया जाएगा जहां उन्हें फिलहाल रखा गया है।

अमेरिकी अभियोजकों ने असांजे पर जासूसी के 17 आरोप लगाए हैं जबकि एक आरोप कंप्यूटर के दुरुपयोग का भी है। इन आरोपों में अधिकतम सजा 175 साल कैद है। ये इल्ज़ाम एक दशक पहले लीक हुए सेना एवं राजनयिक दस्तावेजों को विकीलीक्स द्वारा प्रकाशित करने के संबंध में हैं।

ऑस्ट्रेलिया के 49 वर्षीय नागरिक के वकीलों ने दलील दी है कि वह पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे, इसलिए वह दस्तावेजों को प्रकाशित करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षण के हकदार हैं। इन दस्तावेजों में अमेरिकी सैनिकों द्वारा इराक और अफगानिस्तान में किए गए कथित गलत कामों के बारे में जानकारी है।

दूसरी ओर अमेरिकी सरकार के वकीलों ने इस बात से इनकार किया है कि असांजे के खिलाफ अभियोजन मात्र लीक दस्तावेजों को प्रकाशित करने के लिए चलाया जा रहा है, बल्कि मामले का बड़ा हिस्सा राजनयिक केबल (संवाद) और सैन्य फाइलों को चुराने में अवैध संलिप्तता पर आधारित है।

अमेरिका का आरोप है कि असांजे ने सैन्य खुफिया मामले की विश्लेषक चेल्सी मैनिंग के साथ मिलकर रक्षा विभाग के गुप्त कंप्यूटर के पासवर्ड का पता लगाया।

न्यायाधीश ने कहा कि असांजे क्लिनीकल अवसाद से पीड़ित हैं जो पृथक रहने से और बढ़ेगा। उन्हें अमेरिका के जेल में अलग ही रखे जाने की संभावना है।

न्यायाधीश ने कहा कि असांजे के पास ‘ मेधा और दृढ़संकल्प’ है जो अधिकारियों के आत्महत्या रोकथाम को लेकर उठाए जाने वाले कदमों को नाकाम कर सकता है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘ मैं बात से पूरी से संतुष्ट हूं कि अमेरिका द्वारा बताई गई प्रक्रिया असांजे को आत्महत्या का रास्ता तलाशने से नहीं रोकेगी। इस वजह से मैंने निर्णय लिया है कि मानसिक क्षति के कारण प्रत्यर्पण अत्याचारी होगा और मैं उन्हें आरोप मुक्त करने का आदेश देती हूं।’

असांजे सूट पहने हुए थे और मास्क लगाए हुए थे। न्यायाधीश के फैसला पढ़ने के बाद उन्होंने आंखें बंद करके राहत की सांस ली। उनकी मंगेतर स्टेला मोरिस भी अदालत में मौजूद थीं।

विकीलीक्स के प्रधान संपादक क्रिस्टिन हर्टसन ने मामले को ऐतिहासिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला बताया है।

असांजे को मई 2019 में जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए 50 हफ्तों की सजा सुनाई गई थी। पिछले सितंबर में उन्हें जासूसी के आरोप में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था।

असांजे की परेशानियां तब शुरू हुई थी जब 2010 में स्वीडन के आग्रह पर लंदन में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। स्वीडन दो महिलाओं द्वारा लगाए गए बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर असांजे से पूछताछ करना चाहता था। स्वीडन भेजे जाने से बचने के लिए असांजे ने 2012 में लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास में शरण ली थी। इस तरह वह ब्रिटेन और स्वीडन के अधिकारी की पहुंच से दूर हो गए।

अप्रैल 2019 में दूतावास से बाहर आने पर ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें जमानत लेकर भागने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

स्वीडन ने नवंबर 2019 में यौन उत्पीड़न के आरोप वापस ले लिए क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा समय लग गया था। लेकिन असांजे लंदन की जेल में ही रहे और प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई के लिए उन्हें जेल की वैन से अदालत लाया गया।

भाषा

नोमान नीरज

नीरज

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