Ujjain Simhastha Mela:जमीन अधिग्रहण का पेंच फंसा, कुंभ क्षेत्रों की स्टडी कर 15 दिन में सरकार से मांगी तुलनात्मक रिपोर्ट

MP Ujjain Simhastha 2028 Land Acquisition Case Report: मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ मेले के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रोसेस में एक नया पेंच फंस गया है। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार से कुंभ क्षेत्र नाशिक और हरिद्वार की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है।

Ujjain Simhastha Mela

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MP Ujjain Simhastha 2028 Land Acquisition Case Report: मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ मेले के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रोसेस में एक नया पेंच फंस गया है। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार से कुंभ क्षेत्र नाशिक और हरिद्वार की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। भारतीय किसान संघ की मांग के बाद फिलहाल स्थायी निर्माण पर सहमति नहीं दी है।

दरअसल, 27 अगस्त, 2025 को दिल्ली में उज्जैन सिंहस्थ 2028 का प्रेजेंटेशन हुआ। जिसमें मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र के लिए लगभग 2,376 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण पर चर्चा की गई। इसमें किसानों की निजी जमीनें भी शामिल हैं। सरकार ने यहां स्थायी निर्माण के प्रस्ताव भी बताए।

स्थायी निर्माण की क्या जरूरत?

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से पूछा कि सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण क्यों कराया जा रहा है। इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से हरिद्वार का उदाहरण दिया गया और बताया कि वहां ऐसी व्यवस्थाएं पहले से हैं।

ACS - किसानों को नहीं होगा नुकसान

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने कहा कि ये व्यवस्थाएं बरसों पुरानी हैं, जबकि उज्जैन में इसकी क्या जरूरत है। नगरीय विकास के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने अधिग्रहण योजना की पूरी जानकारी दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस योजना से किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।

जमीन अधिग्रहण पर क्यों उठा सवाल?

सिंहस्थ क्षेत्र में निजी जमीनों पर स्थायी निर्माण को लेकर किसान सहमत नहीं हैं। जिसको लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में केंद्र को सरकार की शिकायत की गई थी। भारतीय किसान संघ प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना के मुताबिक, यह मामला 17 गांवों के किसानों से जुड़ा है।

किसानों की जमीन क्यों छीन रहे?

अखिल भारतीय संगठन महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने सवाल किया था कि जब किसान अपनी जमीन देना नहीं चाहते, तो इसे क्यों छीना जा रहा है?

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