देश में पहली बार 5 वकीलों का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड: कोर्ट में प्रैक्टिस पर बैन, स्टेट बार काउंसिल ने क्यों लिया एक्शन

MP Lawyers Registration Suspend: स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश ने एक मामले में 5 वकीलों का रजिस्ट्रेशन (सनद) सस्पेंड कर दिया है। इन वकीलों को उज्जैन के पत्रकार घनश्याम पटेल पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोषी पाया गया।

MP Lawyers Registration Suspend

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हाइलाइट्स

  • उज्जैन में गवाही देने से रोका,जानलेवा हमला किया
  • पांचों वकीलों  को 28 अगस्त 2025 को सुनाई गई सजा
  • स्टेट बार काउंसिल ने पांचों वकीलों की सनद निलंबित की

MP Lawyers Registration Suspend: स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश ने एक मामले में 5 वकीलों का रजिस्ट्रेशन (सनद) सस्पेंड कर दिया है। इन वकीलों को उज्जैन के पत्रकार घनश्याम पटेल पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोषी पाया गया। इसके बाद काउंसिल ने यह कार्रवाई की। काउंसिल के अनुसार संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है जब 5 वकीलों की सनद निलंबित की गई है।

वकीलों ने पत्रकार पर किया था हमला

मारपीट की यह घटना 10 फरवरी 2009 की है, जब वकील धर्मेंद्र शर्मा और उसके भाई के खिलाफ चल रहे एक मामले में पत्रकार घनश्याम पटेल को गवाही देनी थी। इससे नाराज होकर धर्मेंद्र शर्मा और अन्य चार वकीलों ने उन्हें लाठी, डंडों, कुर्सी और लोहे की छड़ों से हमला किया था।हालांकि इससे पहले आरोपियों ने पटेल को जान से मारने की धमकी दी। इसकी शिकायत पटेल ने उज्जैन पुलिस में दर्ज कराई थी।

रिवॉल्वर, चेन और घड़ी भी लूट ली थी

शिकायत के अगले ही दिन, जब घनश्याम पटेल कोर्ट पहुंचे, तो पांचों आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। इस दौरान पटेल की रिवॉल्वर, चेन और घड़ी भी लूट ली गई। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और पहले उज्जैन के संजीवनी अस्पताल और फिर इंदौर के गोकुलदास अस्पताल में करीब 15 दिन तक भर्ती रहे।

16 साल तक चला मुकदमा, फिर मिली सजा

हमला करने वाले पांचों आरोपी धर्मेंद्र शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा, सुरेंद्र शर्मा (90 वर्षीय), भवेंद्र शर्मा और पुरुषोत्तम राय सभी वकील हैं। चूंकि वे वकील थे, इसलिए सुनवाई के दौरान उन्होंने कोर्ट में कई तरह के प्रभाव डालने की कोशिश की, जैसे कि जजों के तबादले की अर्जी देना और गवाही को प्रभावित करना।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे उज्जैन से इंदौर कोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। 16 साल तक इस केस में सुनवाई चली और आखिरकार 28 अगस्त 2025 में इंदौर की जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

वकीलों को ये हुई सजा

4 वकीलों को सात साल की सश्रम कारावास और 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया था, जबकि 90 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा को तीन साल की सामान्य कैद की सजा सुनाई गई।

पत्रकार ने खबर बनाई थी, गवाही देने वाला था

उज्जैन के पत्रकार घनश्याम पटेल ने एक महिला के तलाक के बारे में एक खबर छापी थी, इस मामले में महिला के पति का वकील धर्मेंद्र शर्मा पैरवी कर रहे थे। जब उन्हें पता चला कि घनश्याम पटेल को कोर्ट में गवाही देनी है, तो उन्होंने धमकाने की कोशिश की, लेकिन जब वो गवाही देने कोर्ट पहुंचे, तो उन पर कोर्ट परिसर में जानलेवा हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

घनश्याम पटेल की शिकायत पर उज्जैन पुलिस ने एडवोकेट धर्मेंद्र शर्मा समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। बार काउंसिल को भी घनश्याम पटेल ने शिकायत की थी कि धर्मेंद्र शर्मा के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

'ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा'

स्टेट बार काउंसिल ऑफ मध्यप्रदेश ने इन सभी वकीलों की वकालत की सनद को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। काउंसिल के चेयरमैन राधेलाल गुप्ता और उपाध्यक्ष आरके सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपराधिक प्रवृत्ति वाले वकील को बख्शा नहीं जाएगा।

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ये वकील कोर्ट में नहीं कर सकेंगे प्रैक्टिस

काउंसिल के वाइस चेयरमैन ने कहा, "पांचों वकीलों की सनद आगामी आदेश तक के लिए निलंबित की गई है। इसका मतलब है अब ये वकील किसी भी कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
बार काउंसिल ऐसे सभी मामलों में सख्ती से कार्रवाई करेगी, जिनमें अधिवक्ताओं की संलिप्तता आपराधिक गतिविधियों में पाई जाएगी।"

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