MP के दो शहर जहां किसी भी मुख्यमंत्री को जाने से लगता है डर, जानिए क्या है मिथक

Two cities of MP

भोपाल। हम अपने जीवन में कई मिथक से घिरे होते हैं जिसे तोड़ पाना आसान नहीं होता। क्योंकि हम ऐसा करने से हमेशा डरते हैं। वहीं अगर यह मिथक राजनीति से जुड़ा है तो फिर क्या कहना। राजनेता अपने कुर्सी से कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। मप्र की राजनीति में भी कई ऐसे मिथक हैं जिससे नेता रिस्क नहीं लेना चाहते। प्रदेश में इछावर (Ichhawar) एक ऐसी जगह है जहां कोई भी सीएम नहीं जाना चाहता। जो भी यहां गया उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

इस कारण से कोई सीएम नहीं जाता इछावर

राजधानी भोपाल से महज 57 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इछावर को लेकर कई ऐसी रोचक घटनाएं दर्ज हैं जिससे नेताओं को यहां जाने से डर सताने लगता है। कहा जाता है कि इछावर के चारों तरफ बावड़ी और शमशान घाट हैं। इस कारण से जो भी मुख्यमंत्री यहां जाता हैं। उसकी कुर्सी चली जाती है। डर से इस विधानसभा में कोई भी सीएम अपनी जनसभा तक नहीं करते।

दिग्विजय सिंह की चली गई थी कुर्सी

हालांकि साल 2003 में दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने सीएम रहते हुए इछावर के मिथक को तोड़ने का प्रयास किया था और वहां पहुंचकर कहा था कि ‘मैं मुख्यमंत्री के रूप में इछावर के इस मिथक को तोड़ने आया हूं’ लेकिन जैसे ही चुनाव हुए, उन्हें करारी हार मिली। दिग्विजय से पहले अर्जुन सिंह (Arjun Singh) ने भी सीएम रहते इछावर का दौरा किया था और उनकी भी कुर्सी चली गई थी। उन्हें तब तत्कालिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंजाब का राज्यपाल बना दिया था।

अशोक नगर को लेकर भी ऐसा ही है मिथक

इछावर के अलावा अशोक नगर (Ashok nagar) को लेकर भी ऐसा ही अंधविश्वास है। कहा जाता है कि साल 1988 में मोतीलाल वोरा जब मुख्यमंत्री थे तब उनकी कर्सी भी अशोक नगर जाने से चली गई थी। दरअसल, तत्कालीन रेल मंत्री माधवराव सिंधिया के साथ रेलवे फुट ओवर ब्रिज का उद्घाटन करने मोतीलाल वोरा अशोकनगर चले गए थे। जिसके थोड़ दिन बाद ही उनकी कुर्सी चली गई थी। इसके अलावा सुंदरलाल पटवा (Sunderlal Patwa) मुख्यमंत्री के तौर पर जैन समाज के एक महोत्सव में शामिल होने के लिए अशोक नगर गए और उनकी भी कुर्सी चली गई। यही कारण है कि इछावर और अशोक नगर कोई भी मुख्यमंत्री नहीं जाना चाहता।

नोएडा को लेकर भी है मिथक

मप्र के अलावा यूपी में भी नोएडा एक एसी जगह है जहां मुख्यमंत्री जाने से डरते हैं। वहां भी कोई मुख्यमंत्री नहीं जाना चाहता। कहा जाता है कि एक बार मायावती (Mayawati)वहां गईं थी। जिसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी गवांनी पड़ी थी। हालांकि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने वहां जाकर इस मिथक को तोड़ दिया और वो अब तक सीएम की कुर्सी पर बनें हुए हैं।

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