Two-Child Policy: जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर क्यों मचा है बवाल, जानें किन राज्यों में पहले से लागू है यह नीति

Two-Child Policy: जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर क्यों मचा है बवाल, जानें किन राज्यों में पहले से लागू है यह नीतिTwo-Child Policy: Why is there a ruckus about the population control law, know in which states this policy is already implemented nkp

Two-Child Policy: जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर क्यों मचा है बवाल, जानें किन राज्यों में पहले से लागू है यह नीति

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने के फिराक में है। लागू करने से पहले लोगों को जागरूक किया जाएगा। जागरूकता अभियान को 27 जून से शुरू किया जाएगा। हालांकि इस कानून को लेकर अब आवाजें भी उठने लगी हैं। लोग इस कानून को लेकर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि पहले भी कई राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू हो चुका है, वहां क्या हुआ? ऐसे में यह जानना जरूरी है कि देश के किन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया है।

1. असम

असम में इस कानून को हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसले से लागू किया गया है। जिसके अनुसार, वर्ष 2021 से दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।

2. राजस्थान

राजस्थान में भी सरकारी नौकरियों के मामले में जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक बच्चे होंगे वे नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। साथ ही राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक बच्चे हैं तो उसे ग्राम पंचायत या वार्ड सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य घोषित किया जाएगा। हालांकि पिछली सरकार ने विकलांग बच्चे के मामले में दो बच्चों संबंधी मानदंड में ढील दी गई थी।

3. मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश वर्ष 2001 के बाद से ही दो बच्चों के मानदंड संबंधी नीति का पालन कर रहा है। मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के अनुसार, 26 जनवरी, 2001 को या उसके बाद यदि तीसरे बच्चे का जन्म होता है तो वह व्यक्ति किसी भी सरकारी सेवा हेतु अयोग्य माना जाएगा। यह नियम उच्चतर न्यायिक सेवाओं पर भी लागू होता है। मध्य प्रदेश ने वर्ष 2005 तक स्थानीय निकाय चुनावों के उम्मीदवारों के लिये दो-बच्चों के आदर्श का पालन किया परंतु व्यावहारिक रूप से आपत्तियां आने के बाद इसे बंद कर दिया गया। हालांकि विधानसभा और संसदीय चुनावों में ऐसा नियम लागू नहीं था।

4. तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश

धारा 19 (3) के तहत तेलंगाना पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 153 (2) और 184 (2) के तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य घोषित किया जाएगा। हालांकि 30 मई, 1994 से पहले अगर किसी व्यक्ति के दो से अधिक बच्चे थे तो उसे अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा। आंध्र प्रदेश पंचायत राज्य अधिनियम, 1994 में समान खंड आंध्र प्रदेश के लिये भी लागू होता है, जहां दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया जाएगा।

5. गुजरात

गुजरात में वर्ष 2005 में सरकार द्वारा गुजरात स्थानीय प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन किया गया था जिसके अनुसार स्थानीय स्वशासन, पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगर निगम के निकायों का चुनाव लड़ने हेतु दो से अधिक बच्चों वाले किसी भी व्यक्ति को अयोग्य घोषित किया गया है।

6. महाराष्ट्र

महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम स्थानीय निगम चुनाव (ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम तक) लड़ने के लिये दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति को अयोग्य घोषित किया जाएगा। महाराष्ट्र सिविल सेवा निगम, 2005 के अनुसार, दो से अधिक बच्चों वाले किसी भी व्यक्ति को राज्य सरकार के किस भी पद के लिए आयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ भी दो से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को नहीं दिया जाता।

7. उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकार ने भी दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को पंचायत चुनाव में लड़ने से रोकने का फैसला किया था। इस संबंध में विधानसभा से एक विधेयक भी पारित किया गया था। लेकिन ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ने वालों ने राज्य सरकार के इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी। जहां न्यायालय ने चुनाव लड़ने वालों को राहत देते हुए दो बच्चों वाले मानदंड की शर्त को केवल उन लोगों पर लागू किया जिन्हें जिला पंचायत में चुनाव लड़ना था।

8. ओडिशा

ओडिशा जिला परिषद अधिनियम दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करता है।

9.बिहार

बिहार में भी टू चाइल्ड पॉलिसी लागू है। लेकिन सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक ही ये पॉलिसी सीमित है।

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