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Narada Sting Operation: मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद तनाव जारी, तृणमूल समर्थकों ने RPF जवानों और CBI दफ्तर पर किया पथराव

Narada Sting Operation: मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद तनाव जारी, तृणमूल समर्थकों ने RPF जवानों और CBI दफ्तर पर किया पथराव , Trinamool supporters pelted stones at RPF jawans and CBI office in Narada Sting Operation

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Shreya Bhatia
Narada Sting Operation: मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद तनाव जारी, तृणमूल समर्थकों ने RPF जवानों और CBI दफ्तर पर किया पथराव

कोलकाता। (भाषा) नारद स्टिंग मामले में पश्चिम बंगाल के दो वरिष्ठ मंत्रियों एवं अन्य की गिरफ्तारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के समर्थक सोमवार को यहां सीबीआई कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। तृणमूल कांग्रेस के समर्थक यहां झंडे लहरा रहे थे और सीबीआई तथा केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। नारद मामले में राज्य के दो मंत्रियों तथा तृणमूल के एक विधायक की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सीबीआई कार्यालय पहुंचीं।

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सीबीआई का दफ्तर निजाम पैलेस में केंद्र सरकार के कार्यालय परिसर में स्थित है। यहां पर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं तथा परिसर में अवरोधक लगाए गए हैं। कोलकाता पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में यहां मौजूद हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता फरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा के साथ पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग मामले में कोलकाता में गिरफ्तार किया। नारद स्टिंग मामले में कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर धन लिए जाने के मामले का खुलासा हुआ था।हकीम, मुखर्जी, मित्रा और चटर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी लेने के लिए सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का रुख किया था। वर्ष 2014 में कथित अपराध के समय ये सभी मंत्री थे।

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धनखड़ ने चारों नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी जिसके बाद सीबीआई अपना आरोपपत्र तैयार कर रही है और उन सबको गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए नेताओं के परिजन भी सीबीआई कार्यालय पहुंचे। इनमें हकीम की बेटी, मित्रा का बेटा और चटर्जी की पत्नी शामिल हैं। नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए। यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

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