अब सरकार उठाएगी आपके डेट से लेकर बच्चों तक का सारा खर्चा

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रायपुर में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जिससे साहित्य जगत में शोक की लहर है।

आप भी डेट पर जाना चाहते हैं...पर पैसे नहीं है.. पर अगर आपको डेट पर जाने के पैसे मिलें, शादी का खर्चा सरकार उठाए और बच्चा होने पर आपके अकाउंट में लाखों रुपये आ जाएं, तो कैसा रहेगा? सुनने में यह किसी सपने जैसा लगता है ना? लेकिन दुनिया का एक देश ऐसा है जहाँ यह हकीकत बन चुका है। हम बात कर रहे हैं साउथ कोरिया की! साउथ कोरिया आज तरक्की तो बहुत कर रहा है, लेकिन यहाँ की लाइफ इतनी बिजी हो गई है कि लोगों के पास खुद के लिए भी समय नहीं है। सुबह उठकर सीधे ऑफिस और रात को थककर घर लौट आना..बस यही जिंदगी बनकर रह गई है। नतीजा? लोगों की पर्सनल लाइफ और डेटिंग पूरी तरह खत्म हो गई है। अब जब लोग डेट ही नहीं कर रहे, तो शादियाँ नहीं हो रही हैं और शादियाँ नहीं हो रही हैं तो बच्चे पैदा नहीं हो रहे। साउथ कोरिया में चाइल्ड बर्थ रेट यानी बच्चों के पैदा होने की रफ्तार इतनी कम हो गई है कि सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। अगर ऐसा ही रहा, तो आने वाले समय में देश की आबादी बहुत कम हो जाएगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार अब 'मैचमेकर' की भूमिका निभा रही है। अगर आप किसी के साथ डेट पर जाते हैं, तो सरकार आपको करीब 31,000 रुपये दे रही है। इस पैसे से आप शानदार रेस्तरां में खाना खाइए, फिल्म देखिए या साथ में कोई एक्टिविटी कीजिए...सब कुछ फ्री है! यहाँ तक कि अगर दोनों के पेरेंट्स आपस में मिलते हैं, तो उसका खर्चा भी अलग से दिया जा रहा है। भारत में हमने सामूहिक विवाह देखे हैं, लेकिन साउथ कोरिया का ये ऑफर तो नेक्स्ट लेवल है। अब आप सोच रहे होंगे कि लोग खुद से शादी क्यों नहीं कर रहे? असल में साउथ कोरिया में लिविंग कॉस्ट यानी रहने का खर्चा बहुत ज्यादा है। महंगाई इतनी है कि लोग चाहकर भी परिवार बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। सरकार ने अब यह भी साफ कर दिया है कि सिर्फ शादी ही नहीं, बच्चे होने के बाद भी अलग से फंड दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि लोग बस एक-दूसरे से मिलें, रिलेशन में आएं और परिवार बढ़ाएं...बाकी पैसों की चिंता उन पर छोड़ दें। तो दोस्तों, क्या आपको लगता है कि सिर्फ पैसे देकर लोगों को प्यार और परिवार के लिए मनाया जा सकता है? क्या भारत में भी कभी ऐसी स्कीम की जरूरत पड़ेगी? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!

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