यहां अपनों की मृत्यु पर शिवलिंग किये जाते हैं दान... जंगमबाड़ी मठ की अनोखी परंपरा। Varanasi News

वाराणसी का प्राचीन जंगमबाड़ी मठ, जिसे 'कोटि शिवलिंग मठ' भी कहा जाता है, अपनी अनूठी वीरशैव परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान के स्थान पर शिवलिंग स्थापित करने की अद्भुत परंपरा है।

वाराणसी की पावन धरती पर स्थित जंगमबाड़ी मठ अपनी प्राचीनता, वीरशैव परंपरा और अनूठी मोक्ष मान्यता के लिए प्रसिद्ध है...जिसे कोटि शिवलिंग मठ के नाम से भी जाना जाता है....जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान के बजाय शिवलिंग स्थापित करने की परंपरा है....यह मठ वीरशैव संप्रदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है..जहां शिवलिंग को संकट मुक्ति और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है...मान्यता है कि शिवलिंग के स्पर्श और अभिषेक से मन को गहरी शांति मिलती...वीरशैव परंपरा में नवजात शिशु को इष्ट लिंग धारण कराया जाता है...और जीवनभर लिंग पूजा कर मोक्ष की प्राप्ति की जाती है ।

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