प्यार, पैसा और समझौता, ये सिर्फ फिल्मों की कहानी नहीं है. भोपाल में एक ऐसी दास्तान सामने आई. जिसने 90 के दशक की सुपरहिट फिल्म जुदाई की याद ताजा कर दी. फर्क बस इतना है कि यहां स्क्रिप्ट राइटर नहीं, हालात ने कहानी लिख. और क्लाइमैक्स हुआ कुटुंब न्यायालय में. जी हां. सही सुना आपने. एक 42 साल के अधिकारी, उसी दफ्तर में काम करने वाली 54 साल की महिला, और 18 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता तकरार में बदल गया. न्यायालय की काउंसलर सरिता राजानी ने बताया कि 16 साल की एक लड़की ने उनके पास शिकायत की थी कि मम्मी-पापा अकसर झगड़ा करते हैं. इसका खराब असर मेरी 12 साल की छोटी बहन पर भी पड़ रहा है. जिसे सुन काउंसलर ने तीनों को पहले काउंसलिंग के लिए तैयार किया. बाद में पत्नी ने पति को छोड़ने के लिए बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की शर्त रखी. जिसे प्रेमिका ने मान लिया. और अपने प्यार के लिए अपनी जीवन भर की कमाई यानी कि करीब डेढ़ करोड़ की संपत्ति पत्नी के नाम कर दी. इस कहानी में फैसला पैसों के लिए नहीं, बेटियों के भविष्य के लिए लिया गया. यहां इमोशन भी थे. इकरार भी और आखिर में एक कानूनी समझौता भी. लेकिन इस समझौते ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया की आखिर प्यार की कीमत क्या होती है? क्या रिश्ते पैसों से तौले जा सकते है या कभी-कभी समझौता ही सबसे बड़ा समाधान होता है.
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