Aaj Ka Mudda: मध्यप्रदेश की मंडियां..जहां से किसान का सीधा रिश्ता है..कितना अनाज..किस दाम प..कैसी सुविधाओं के साथ बिकेगा..ये सब यहीं तय होता है..लेकिन सालों से मंडियां प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं..और किसान खुद को सिस्टम से दूर महसूस कर रहे हैं..सहकारिता समितियों का हाल भी अलग नहीं है..खाद वितरण से लेकर कर्ज और खरीद तक, सबसे अहम फैसलों में किसानों की भागीदारी कम हो रही है..अब सरकार इसी दूरी को खत्म करने की तैयारी में है.. सूत्रों का दावा है है कि मार्च से पहले मंडी और सहकारिता चुनाव करवाने का रोडमैप लगभग तैयार है..दो दिन पहले सीएम हाउस में हुई विधायक दल की बैठक में इन संकेतों को साफ-साफ महसूस किया गया..बीजेपी विधायक भी मानते हैं कि किसान की समस्याओं को समझने के लिए किसानों का चुना हुआ प्रतिनिधि जरूरी है..सरकार इस दिशा में गंभीर है..कांग्रेस भी मानती है कि मंडी-सहकारिता के चुनाव किसानों की मजबूती का रास्ता हैं..
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