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Health Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी 2026 को देश का बजट पेश किया. इस बजट में हेल्थ सेक्टर को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की गई है. वित्त मंत्री ने बताया कि निजी और सरकारी क्षेत्र में नए AHP संस्थान बनाए जाएंगे और अगले 5 वर्षों में एक लाख AHP को सिस्टम से जोड़ा जाएगा. इसके साथ ही 5 क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना के लिए योजना शुरू करने का प्रस्ताव है. आयुष सेक्टर को मजबूती देते हुए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे.
कैंसर और डायबिटीज की दवाएं होंगी सस्ती
वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि कैंसर और डायबिटीज समेत 7 गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती की जाएंगी. वहीं, ऑटोइम्यून जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयों को सस्ता करने और उन्हें किफायती दरों पर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है. वित मंत्री ने बजट के दौरान हेल्थ केयर सेक्टर को लेकर कई घोषणा की है. आम लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा. ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके. बता दें कि 17 एंटी-कैंसर दवाओं को बेसिक कस्टम्स ड्यूटी से छूट दी जाएगी, जिससे दवाइयों की उपलब्धता सस्ती और आसान होगी.
मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया विशेष ध्यान
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुए NIMHANS 2.0 की स्थापना की जाएगी, खासकर उत्तर भारत के लिए. मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में एक और बड़ा फैसला लेते हुए वित्त मंत्री ने NIMHANS 2.0 की घोषणा की. उन्होंने बताया कि बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) को अब नेशनल लेवल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में और मजबूत किया जाएगा। इसके तहत उत्तर भारत में NIMHANS 2.0 की स्थापना की जाएगी ताकि देश के बड़े हिस्से को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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साइकियाट्रिस्ट वेल फेयर भोपाल के डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी जी का कहना है कि "आज प्रस्तुत बजट 2026‑27 में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना स्वागतयोग्य कदम है। Tele‑MANAS, NIMHANS का उत्तर भारत में विस्तार और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NTCPMM) जैसी पहलें, ग्रामीण और छोटे शहरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और 24×7 काउंसलिंग सेवाओं से तुरंत मदद उपलब्ध हो सकती है, जिससे मानसिक रोगियों और उनके परिवारों को राहत मिलती है। साथ ही, रिसर्च और प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना से विशेषज्ञता और गुणवत्ता में सुधार संभव है।
हालाँकि, वास्तविक प्रभाव तब ही दिखाई देगा जब इन योजनाओं का सतत क्रियान्वयन, पर्याप्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण और निगरानी सुनिश्चित किया जाएगा। बजट की घोषणाएँ सकारात्मक हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता पर ध्यान देना असली चुनौती है।"
एक लाख नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल जोड़े जाएंगे
निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता और पहचान मिली है और आयुर्वेद उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि जामनगर स्थित WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को और मजबूत किया जाएगा. पशु-चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा और निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए पूंजी सब्सिडी सहायता योजना लाई जाएगी. वित्त मंत्री ने बताया कि 1.5 लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. सरकार के मुताबिक ऑरेंज इकोनॉमी में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी.
सरकार अब कौशल पर आधारित रोजगार पर ज्यादा ध्यान देगी। इसके लिए स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने वाले संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। रेडियोलोजी और एनेस्थीसिया जैसे क्षेत्रों पर खास फोकस रहेगा। अगले पांच वर्षों में देश में एक लाख नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल (AHP) जोड़े जाएंगे। साथ ही, 1.5 लाख केयर गिवर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी. देश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच बड़े मेडिकल हब बनाए जाएंगे। इन हब को बनाने में निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। इन हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स में आयुष केंद्र, जांच केंद्र और इलाज के बाद की देखभाल के लिए सेंटर भी होंगे। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
बायोफार्मा के लिए जारी किए 10 हजार करोड़
भारत को दवाओं के निर्माण का एक बड़ा वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी है। इसके लिए सरकार 'बायो-फार्मा शक्ति' नाम से एक पहल शुरू कर रही है। इस बड़ी योजना पर अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मुख्य मकसद नई तकनीक और इनोवेशन के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र को पूरी तरह बदलना है.
इस मिशन के तहत देश में रिसर्च को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। बायो-फार्मा क्षेत्र में शोध के लिए तीन नए राष्ट्रीय संस्थान खोले जाएंगे। इसके अलावा, देश में पहले से मौजूद सात संस्थानों को भी अपग्रेड किया जाएगा। रिसर्च और टेस्टिंग में तेजी लाने के लिए देशभर में 10,000 से ज्यादा क्लीनिकल ट्रायल साइट का नेटवर्क भी बनेगा। साथ ही, योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान भी बनाए जाएंगे.
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