Tokyo Olympics: इन पांच रिंगों के बिना अधूरा होता है ओलंपिक, जानिए इसका महत्व

Tokyo Olympics: इन पांच रिंगों के बिना अधूरा होता है ओलंपिक, जानिए इसका महत्व Tokyo Olympics: Olympics is incomplete without these five rings, know its importance nkp

Tokyo Olympics: इन पांच रिंगों के बिना अधूरा होता है ओलंपिक, जानिए इसका महत्व

नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए शनिवार का दिन काफी महत्वपूर्ण है। जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। नीरज के अलावा बजरंग पुनिया पर भी लोगों की निगाहें हैं। हालांकि, भारत के लिए आज के दिन की शुरूआत अच्छी नहीं रही। आदिति अशोक गोल्फ में इतिहास रचने से चूक गईं। वह व्यगक्तिगत स्ट्रोक प्ले में चौथे स्थान पर रहीं। ओलंपिक के इस माहौल में आज हम आपको इसके 5 स्तंभ (पांच छल्लों) के बारे में बताएंगे जिसके बिना ओलंपिक अधूरा होता है। साथ ही इन सबका क्या महत्व है ये भी आपको बताएंगे।

ये पांच महाद्वीपों को दर्शाते हैं

ओलंपिक खेलों में आपने इन 5 छल्लों को तो जरूर देखा होगा। सभी ओलंपिक में एक जैसे ही छल्ले होते हैं। कई बार आपके मन में यह भी सवाल आया होगा कि आखिर इसका मतलब क्या है। दरअसल, ये जो 5 रिंग होते हैं यह ओलंपिक खेलों के चिन्ह होते हैं। यह पांच रिंग दुनिया के पांच मुख्य महाद्वीपों को दर्शाते हैं। एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या ओसिनिया, यूरोप और अफ्रीका।

पांच रंगों का क्या अर्थ है

बता दें कि ओलंपिक के इन पांच रिंग को पियरे डी कुबर्तिन ने बनाया था। ओलंपिक खेलों के सह-संस्थापक के नाम से भी पियरे डी कुबर्तिन को जाना जाता है। ओलंपिक के इन पांच रिंग का डिजाइन साल 1912 में किया था और सार्वजानिक रूप से इसे 1913 में स्वीकार कराया था। नीला रंग यूरोप के लिए, पीला रंग एशिया के लिए, काला रंग अफ्रीका के लिए, हरा रंग ऑस्ट्रेलिया या ओशिनिया के लिए और लाल रंग अमेरिका के लिए। अफ्रीका के लिए काला इसलिए होता है क्योंकि वह पिछड़ा और गरीब है।

पियरे डी कुबर्तिन ने ही ओलंपिक ध्वज को भी बनाया था। सफेद रंग इस ध्वज को दिया गया है क्योंकि यह ध्वज सिल्क का बनाना होता है और इस पर ओलंपिक के चिन्ह पांच रिंग बनाएंगे हैं।

ओलंपिक खेलों का क्या है मोटो

डोमिनिकन पुजारी हेनरी डिडोन ने साल 1881 में सबसे पहले ओलंपिक के मोटो को एक स्कूल के खेल कार्यक्रम में इस्तेमाल किया गया था। वही कार्यक्रम था जहां पर पियरे डी कुबर्तिन भी थे जिन्होंने उस मोटो को ओलंपिक खेलों का मोटा बना दिया। बता दें कि तीन लैटिन शब्दों से मिलकर ओलंपिक खेलों का मोटो बना है। सिटियस, अल्शियस, फोर्तियस ये शब्द हैं जिनका अर्थ और तेज, और ऊंचा और साहसी है।

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