आज का मुद्दा : '23' की लड़ाई, '66' पर आई ! 66 सीटों पर सेंध लगाना कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती ?

भोपाल। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने एक एक सीट पर फोकस कर रही है। खासकर कांग्रेस ने ऐसी सीटों पर फोकस किया है, जहां उसे 5 बार चुनाव में लगातार हार मिली। जाहिर है इसके पीछे कांग्रेस कोई खास रणनीति जरूर होगी। वहीं बात बीजेपी की करें तो बीजेपी ने इस बार 200 पार का टारगेट खुद के लिए रखा है। ये रिपोर्ट देखिए..

आज का मुद्दा : '23' की लड़ाई, '66' पर आई ! 66 सीटों पर सेंध लगाना कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती ?

भोपाल। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस ने एक एक सीट पर फोकस कर रही है। खासकर कांग्रेस ने ऐसी सीटों पर फोकस किया है, जहां उसे 5 बार चुनाव में लगातार हार मिली। जाहिर है इसके पीछे कांग्रेस कोई खास रणनीति जरूर होगी। वहीं बात बीजेपी की करें तो बीजेपी ने इस बार 200 पार का टारगेट खुद के लिए रखा है।

रणनीति इस बार कुछ अलग

2023 के लिए बीजेपी और कांग्रेस की रणनीति इस बार कुछ अलग दिखेगी। कांग्रेस उन 66 सीटों को जीतने के लिए रणनीति बना रही है, जहां लगातार 5 बार से उसे मुह की खानी पड़ रही है। यानी इन सीटों पर कांग्रेस को जीत नहीं मिली, लेकिन अबकी बार वो इन सीटों को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगी। क्योंकि, ऐसा माना जा रहा है कि सिंधिया और उनके समर्थकों के बीजेपी में जाने के बाद से कांग्रेस की कुछ जिताऊ सीटों पर अब बीजेपी को फायदा मिल सकता है। ऐसे में अगर कांग्रेस को नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई कांग्रेस इन्हीं 66 सीटों से करना चाहेगी।

ये तो वक्त बताएगा

कांग्रेस की रणनीति कितनी कारगर रहने वाली है। ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी को 2018 के मुकाबले इस बार ग्वालियार चंबल समेत दूसरे अंचलों में ज्यादा फायदा मिल सकता है। क्योंकि कभी कांग्रेस के जीताऊ उम्मीदवार माने जाने वाले नेता अब बीजेपी में हैं, इसलिए बीजेपी भी 200 पार का लक्ष्य लेकर चल रही है।

चेहरों का चुनाव पहले ही

कुल मिलाकर कांग्रेस 66 अभेद्य सीटों का समीकरण बैठाने में जुटी है। बताया जाता है कांग्रेस इन सीटों पर सक्रिय और लोकप्रिय चेहरों का चुनाव पहले ही कर लेगी। वहीं इन सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को टिकट देने के साथ ही जातीय और स्थानीय जैसे तमाम मुद्दों को भी टटोला जा रहा है, तो वहीं बीजेपी 200 पार का टारगेट ले आगे बढ़ रही है। और बीजेपी सिंधिया फैक्टर को भुनाएगी। यानी बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां चुनावी बिसात पर मोहरों की चाल तय करने में जुट गई हैं, जिसकी रणनीति ज्यादा असरदार होगी, बाजी उसी की होगी।

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