न्यायिक अधिकारी बनने के लिए बार में तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त लागू की जाए : बीसीआई -



न्यायिक अधिकारी बनने के लिए बार में तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त लागू की जाए : बीसीआई

नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) बार काउन्सिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर न्यायिक अधिकारी बनने के लिए बार में कम से कम तीन साल की प्रैक्टिस को अनिवार्य करने का अनुरोध करेगी।

देश में वकीलों की शीर्ष संस्था बीसीआई ने कहा, ‘‘वकील के तौर पर व्यावहारिक अनुभव नहीं रखने वाले ज्यादातर न्यायिक अधिकारी अक्षम और मामलों के निपटारे के लिए अकुशल पाए गए हैं। ऐसे ज्यादातर अधिकारी अशिष्ट पाए गए हैं और बार के सदस्यों और वादियों के साथ अपने बर्ताव में अव्यावहारिक होते हैं।’’

बीसीआई ने कहा कि वर्तमान में कानून की डिग्री लेकर विश्वविद्यालयों से निकले छात्र देश भर में न्यायिक सेवा की परीक्षा में बैठते हैं, जबकि उनके पास बार का कोई व्यावहारिक अनुभव नहीं होता है।

वकीलों की शीर्ष संस्था ने कहा कि सभी राज्य बार काउन्सिल के साथ बीसीआई न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने के योग्य होने के लिए वकील के तौर पर कम से कम तीन साल का अनुभव निर्धारित किये जाने का पुरजोर समर्थन करता है।

बीसीआई सचिव श्रीमंतो सेन ने दो जनवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा , ‘‘उपयुक्त एवं शालीन व्यवहार के विषय में ऐसे लोगों के पास वकीलों एवं वादियों की आकांक्षाओं एवं उम्मीदों के बारे में समझ का अभाव होता है।’’

बीसीआई ने कहा कि बार का अनुभव नहीं होना निचली अदालतों में मामलों के निपटारे में विलंब का प्राथमिक और एक बड़ा कारण है।

बार में तीन साल के अनुभव की जरूरत को उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2002 के एक आदेश के जरिए समाप्त कर दिया था।

बीसीआई ने कहा कि वह शीर्ष न्यायालय में एक अर्जी दायर कर उस आदेश में संशोधन करने का अनुरोध करेगा।

उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर किये जाने के मद्देनजर यह बयान आया है।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश लोकसेवा आयोग ने दिसंबर 2020 की एक अधिसूचना के द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिविजन) के लिए ऐसे वकीलों से आवेदन आमंत्रित किये हैं, जिनके पास कम से कम तीन साल की वकालत का अनुभव है।

इस अधिसूचना के खिलाफ शीर्ष न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप

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