लापता है भोपाल के टाइगर्स का परदादा …

भोपाल. देश में शायद भोपाल ही एक ऐसा शहर है, जहां पर टाइगर्स का मूवमेंट शहर के नजदीक है। इसे दूसरी तरह कहें तो भोपाल शहर की मानव आबादी टाइगर्स के इलाके में जा पहुंची है। इतना होने पर भी यहां का एक भी बाघ आदमखोर नहीं है। हालांकि, बाघ ने कुछ अवसरों पर लोगों को घायल अवश्य किया है। इस शहर के आसपास बाघों का बड़ा कुनबा बसाने वाले बाघ का आजकल कुछ पता नहीं चल पा रहा है। वन विभाग के अधिकारी भी कहते हैं कि कई महीनों से बाघ की उपस्थिति कलियासोत—केरवा के जंगलों में नहीं पाई गई है।

करीब छह वर्ष पूर्व की थी आमद
वन विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2014—15 में नर बाघ टी—1 और बाघिन टी—2 ने भोपाल के करीब समरधा फॉरेस्ट रेंज के कलियासोत—केरवा इलाके में टेरिटरी स्थापित की थी। इन जोड़े से कई बाघ—बाघिन जन्मे। दो बाघों को अन्यत्र शिफ्ट भी किया गया था। वर्ष 2018 में इस क्षेत्र में टी—3 और टी—4 दो युवा बाघों ने आमद की। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो इन युवा बाघों ने इस टेरिटरी के बादशाह टी—1 बाघ् को रातापानी सेंक्चुरी की तरफ खदेड़ दिया था।

कई महीनों से ​नहीं दिखा
काफी समय तक भोपाल के जंगलों में बादशाहत कायम रखने वाले टाइगर टी—1 को कई महीनों से नहीं देखा गया है। वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि कोरोना काल में लॉकडाउन से पहले कभी—कभी टाइगर टी—1 के पग मार्क दिखाई ​पड़ जाते थे, लेकिन कई महीनों से उसकी प्रिजेंस नहीं पता चल रही। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो टाइगर के पग मार्क को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है कि ये टाइगर टी—1 के पग मार्क हैं या टी—3 के।

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