श्मशान घाट की छत गिरने के मामले में तीन अधिकारी गिरफ्तार, पीड़ितों के परिजन ने राजमार्ग बाधित किया

गाजियाबाद (उप्र), चार जनवरी (भाषा) गाजियाबाद पुलिस ने यहां एक श्मशान घाट की छत ढहने के मामले में तीन नगर निकाय अधिकारियों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया वहीं इलाके में तनाव बढ़ने के बीच हादसे में मारे गए लोगों के परिजन ने अधिक मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर दो शव रखकर दिल्ली-मेरठ राजमार्ग जाम कर दिया।

इस हादसे में 24 लोगों की मौत हो चुकी है।

पीड़ितों के परिजन ने हर शोकसंतप्त परिवार के लिए एक सरकारी नौकरी की भी मांग की। अधिकारियों ने पीड़ितों के परिजन को मार्ग से हटने के लिए मनाने की कोशिश की।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) इराज राजा ने बताया कि मुरादनगर नगर पालिका की कार्यकारी अधिकारी निहारिका सिंह, कनिष्ठ अभियंता चंद्र पाल और सुपरवाइजर आशीष को सोमवार सुबह गिरफ्तार किया गया।

राजा ने बताया कि पुलिस की टीम ठेकेदार अजय त्यागी को गिरफ्तार करने के लिए उसके संभावित ठिकानों पर छापे मार रही हैं।

इस बीच, पीड़ितों के परिजन एवं मित्रों ने मुरादनगर पुलिस थाने के निकट सड़क पर दो शवों को रखकर दिल्ली-मेरठ राजमार्ग बाधित कर दिया। इसके कारण सुबह व्यस्त समय में अहम मार्ग पर सैकड़ों वाहन फंस गए।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनसे बातचीत के लिए जिलाधिकारी को बुलाया जाए, ताकि वे हर शोकसंतप्त परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा और हर परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की मांग उनके सामने रख सकें।

अधिकारियों ने बताया कि जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि निथानी बाद में प्रदर्शनस्थल पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों के वहां पहुंचने के बाद सड़क को आंशिक रूप से खोल दिया गया और दो पहिया वाहनों एवं एम्बुलेंस को गुजरने की अनुमति दी गई।

उल्लेखनीय है कि मुरादनगर में रविवार को एक श्मशान घाट में छत ढह जाने से 24 लोगों की मौत हो गई थी और 17 अन्य व्यक्ति घायल हो गये थे। पीड़ितों में से अधिकतर लोग एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट आए थे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

अधिकारियों ने बताया कि श्मशान घाट में जिस गलियारे की छत ढही है, उसका निर्माण कार्य दो महीने पहले शुरू हुआ था। इस गलियारे को बनाने में करीब 55 करोड़ रुपये की लागत आई थी और इसे 15 दिन पहले ही आम लोगों के लिए खोला गया था।

भाषा सिम्मी अविनाश

अविनाश

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