एक लड़की के कारण करीब 40 वर्षों तक बंद रहा था यह रेलवे स्टेशन, जानिए अब क्या हैं वहां के हालात

railway station

नई दिल्ली। देश में कई ऐसे रेलवे स्टेशन हैं जिन्हें भुतहा माना जाता है। लोग यहां शाम ढ़लते ही जाने से डरते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि देश का एक रेलवे स्टेशन ऐसा भी है जो एक लड़की की वजह से 40 सालों तक बंद रहा। यह रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले में स्थित है, जिसका नाम है बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन।

1960 में खुला था स्टेशन

यह रेलवे स्टेशन वर्ष 1960 में खुला था। स्टेशन खुलने के कुछ वर्षों तक यहां सबकुछ ठीक चल रहा था। लेकिन बाद में यहां अजीबोगरीब घटनाएं घटने लगीं। दरअसल, साल 1967 में एक रेलवे कर्मचारी ने बेगुनकोडोर स्टेशन पर एक महिला का भूत देखने का दावा किया। अफवाह उड़ी कि यहां एक महिला की ट्रेन दुर्घटना में मौत हो गई थी, वहीं लोगों को दिखती है। हालांकि, तब लोगों ने इस चीज पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन असली परेशानी तब शुरू हुई जब कुछ समय बाद बेगुनकोडोर के स्टेशन मास्टर और उनका पूरा परिवार रेलवे क्वार्टर में मृत अवस्था में पाया गया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इस मौत के पीछे उसी लड़की का हाथ है।

स्थानीय लोग क्या कहते थे

लोगों का कहना था कि शाम होते ही जब कोई ट्रेन यहां से गुजरती है तो महिला का भूत उसके साथ-साथ दौड़ने लगता है और कभी-कभी तो वो ट्रेन से भी तेज दौड़कर आगे निकल जाता है। इसके अलावा कई लोगों ने भूत को पटरियों पर नाचते हुए देखे जाने का भी दावा किया। धीरे-धीरे करके लोग इस स्टेशन पर जाने से डरने लगे और इसे भूतिया रेलवे स्टेशन माना जाने लगा। रेलवे कर्मचारी भी इस स्टेशन पर जाने से डरने लगे।

कर्मचारी भी यहां जाने से मना कर देते थे

कहते हैं कि जब किसी रेलवे कर्मचारी की बेगुनकोडोर स्टेशन पर पोस्टिंग होती थी, तो वो तुरंत ही यहां आने से मना कर देता था। स्टेशन को लेकर दहशत का माहौल इस कदर था कि इस स्टेशन पर ट्रेनों का रुकना भी बंद हो गया। लोग इस स्टेशन पर डर से उतरना नहीं चाहते थे और न ही कोई यहां से चढ़ने के लिए आता था। इसके बाद ही पूरा स्टेशन विरान हो गया।

42 साल बाद इस स्टेशन को एक बार फिर से खोला गया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस स्टेशन से गुजरने से पहले लोको पायलट ट्रेन की गति बढ़ा देते थे, ताकि जल्द से जल्द वो इस स्टेशन को पार कर सकें। यात्री भी स्टेशन पार करने से पहले खिड़की-दरवाजे सब बंद कर लेते थे। हालांकि, 42 साल बाद 2009 में गांववालों के कहने पर तत्कालीन रेल मंत्री और वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी ने एक बार फिर से इस स्टेशन को खुलवाया। तब से लेकर अब तक इस स्टेशन पर किसी भूत को देखे जाने का कोई दावा नहीं किया गया है। हालांकि लोग आज भी शाम ढलने के बाद यहां जाने से डरते हैं। फिलहाल यहां कई ट्रेनें रूकती हैं।

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