Interesting Facts: भारत के इस शहर को बनाया गया था, एक दिन के लिए राजधानी, जानें वजह

भारत में हर राज्य से लेकर इसके शहरों तक की अपनी अलग पहचान है। शहरों की इन सांझी विरासत के किस्से अब भी हमे सुनने को मिल जाते हैं।

Interesting Facts: भारत के इस शहर को बनाया गया था, एक दिन के लिए राजधानी, जानें वजह

Capital of India for One Day : भारत में राज्य से लेकर शहरों तक की अपनी अलग पहचान है। शहरों की प्राकृतिक और मानवीय धरोहरें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। इनकी सांझी विरासत के किस्सें अब भी हमें सुनने को मिलते हैं। प्रत्येक शहर का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

आज हम बात करने जा रहे हैं, एक ऐसे शहर के बारे में जो एक दिन के लिए भारत की राजधानी बना था। भारत के इतिहास में ऐसी घटना हुई थी,  लेकिन कब, कहा और कैसे हुई ये सब हम आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे।

इस शहर को बनाय गया था राजधानी

मुगलों का अधिपत्य समाप्त होने के बाद भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ गया था। अंग्रेजों ने भारत पर व्यापार और धन कमाने के लक्ष्य से सालों तक राज किया। बात 1858 की है जब अंग्रेजी शासनकर्ताओं ने इलाहाबाद को एक दिन के लिए देश की राजधानी बनाया था। इस समय इलाहाबाद को उत्तर पश्चिमी प्रांत की राजधानी बनाया गया था।

मुगलों के समय इसे मुख्यालय भी बनाया गया

भारत की एक के दिन के लिए राजधानी इलाहाबद शहर अब प्रयागराज बन चुका है। अब इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बरकरार है। भारत में इस शहर का नाम इलाहाबाद मुगल शासकों के द्वारा रखा गया था।

अकबर ने रखा था इलाहाबाद नाम

मुगल शासक अकबर ने इसे इलाहाबाद नाम दिया था। इस नाम का मतलब होता है अल्लाह का शहर यानि इलाहाबाद। मुगल काल के दौरान इसे एक प्रांतीय राजधानी बनाया गया था। साल 1599 से 1604 तक यह शहर मुगल शासक जहांगीर के कब्जे में था तभी इसे जहांगीर ने अपना मुख्यालय भी बनाया था।

शहर का है विशेष धार्मिक महत्व

हालांकि अब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है। बता दें कि प्रयागराज शुरू से ही  प्रशासनिक और शिक्षा के मामले में अग्रणी जिला रहा है। इसके साथ ही यह पर्यटन का केंद्र रुप में भी जाना जाता है। शहर में ऐसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं जो इसकी विरासत का परिचय देते हैं।

बड़ी संख्या में आते हैं लोग

धार्मिक त्योहारों पर बड़ी संख्या में लोग यहां के संगाम में स्नान करने आते हैं। बता दें कि प्रयागराज में ही तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम का है। यहां पर 12 सालों के अंतराल में महाकुंभ का मेला भी लगता है। इस कुंभ देश ही नहीं विदेश से भी लोग आते हैं। साथ ही देश के अखाडों के पंडाल भी प्रयागराज के गंगा किनारे लगते हैं।

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