कर्नाटक में जिस "हिजाब" को लेकर मचा है बवाल, जानिए इस्लाम में क्या है इसका महत्व

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नई दिल्ली। कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद (Karnataka Hijab Controversy) अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। कई लोग हिजाब को निजी मामला बता रहे है, तो कई लोगों का कहना है कि स्कूल में ड्रेस कोर्ड को ही फॉलो करना चाहिए, स्कूल में ड्रेस का इस्तेमाल इसलिए ही किया जाता है ताकि अमीर, गरीब उंच, नीच से उपर उठकर सभी बच्चे एक जैसे लगें।

कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है। बीजेपी का मानना है कि धार्मिक प्रतीक का शिक्षण संस्थानों में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। जबकि कांग्रेस मुस्लिम लड़कियों का समर्थन कर रही है। मामला हाई कोर्ट में भी पहुंच गया है। यानी सियासत से लेकर अदालत तक राज्य में हर कोई विवाद में उलझ गया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मुस्लिम धर्म में 'हिजाब' को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।

हिजाब एक अरबिक शब्द है

मालूम हो कि हिजाब एक अरबिक शब्द है। जिसका अंग्रेजी में अर्थ होता है 'कवर'। हिजाब महिलाओं से जुड़ा है और इसे कई और नामों से भी जाना जाता है। खासकर हिजाब का चलन इस्लाम धर्म में ज्यादा है और मुस्लिम धर्म में इसका काफी महत्व है। हिजाब को लेकर मुस्लिम स्कॉलर 'शोएब जामई' बताते हैं कि इस्लाम के संस्थापक हजरत मोहम्मद पैगंबर की पत्नियां हिजाब से घूंघट करती थी और इसी के चलते मुस्लिम धर्म की महिलाओं को इसका पालन करने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, कुछ इस्लामिक विद्वान इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि इस्लाम में हिजाब को इस लिए महत्वपूर्ण माना जाता है ताकि पुरुष, महिलाओं पर गलत नजर न रख सकें। इसके पीछे उनका मानना है कि इस्लाम में सिर और शरीर को ढ़कने की परंपरा पहले भी थी। 'हिसाब' उसी का एक रूप है।

कई धर्मों की महिलाएं सिर ढकती हैं

अगर हम इतिहास को देखें तो यहुदी, ईसाई, सिख, जैन और हिन्दू महिलाएं भी सिर ढकती हैं। यानी सदियों से महिलाएं सिर ढकती रही हैं चाहे वो किसी भी धर्म की क्यों न हो। लेकिन जहां तक हिजाब की बात है, तो हिजाब केवल मुस्लिम महिलाएं ही पहनती हैं। कुछ महिलाएं हिजाब को अपनी जातीय पहचान पर गर्व के रूप में पहनती हैं, तो कुछ मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब महिला सौंदर्य के मानकों का प्रतिरोध का एक साधन बन चूका है। जबकि कुछ महिलाएं घर से बाहर, सड़क और कार्य स्थल पर उत्पीड़न जैसी घटनाओं से बचने के लिए भी हिजाब का सहारा लेती हैं।

हिजाब को मॉडर्न इस्लाम का पर्दा माना जाता है। मालूम हो कि कुरान में मुस्लिम महिलाओं और पुरूषों को शालीन कपड़े पहनने की हिदायत दी गई है। ऐसे में मुस्लिम महिलाएं पर्दा करने के लिए कई प्रकार के वस्त्र का इस्तेमाल करती हैं, जैसे- हिजाब, नकाब, बुर्का, अल-अमीरा, अबाया, दुपट्टा आदि।

नकाब: इसे निकाब भी कहते है, जो चेहरा छुपाने का एक कपड़ा होता है। इसमें सिर और चेहरा पूरी तरह से ढ़का होता है। इसमें सिर्फ आंखें खुली रहती हैं।

बुर्का: नकाब का ही अगला स्तर बुर्का है। जहां नकाब में आंखों के अलावा पूरा चेहरा ढका होता है, वहीं बुर्के में आंखें भी ढकी होती है। बुर्के में आंखों के स्थान पर या तो एक खिड़कीनुमा जाली बनी होती है या कपड़ा हल्ला होता है, जिससे आर-पार दिखता है। इसके साथ ही बुर्के में पूरे शरीर पर एक बिना फिटिंग वाला लबादा होता है। यह अक्सर एक ही रंग का होता है, ताकि गैर-मर्द आकर्षित ना हों।

अल-अमीरा: यह दो कपड़ो का सेट होता है। एक कपड़े को टोपी की तरह सिर पर पहना जाता है। जबकि दूसरा कपड़ा थोड़ा बड़ा होता है जिसे सिर पर लपेटकर सीने पर ओढ़ा जाता है।

अबाया: यह वो पोशाक होती है जिसे भारत में बुर्का कहते हैं। जबकि मिडिल ईस्ट में इसे अबाया कहा जाता है। यह एक लंबी ढकी हुई पोशाक होती है जिसे औरतें भीतर पहने किसी भी कपड़े के ऊपर डाल लेती हैं। इसमें सिर के लिए एक स्कार्फ होता है जिसमें सिर्फ बाल ढके होते हैं और चेहरा खुला रहता है।

दुपट्टा: पाकिस्तान और भारत में सलवार-कमीज के साथ महिलाएं सिर ढकने के लिए दुपट्टे का इस्तेमाल करती हैं। दुपट्टा सलवार-कमीज का ही हिस्सा होता है। इसका मुख्य उद्देश्य सिर ढकना होता है। दुपट्टे का इस्तेमाल भारत में मुस्लिम महिलाओं के अलावा हिंदू और सिख महिलाएं भी करती हैं।

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