Sharadiya Navratri 2023: मप्र में है मां जालपा का 550 साल पुराना मंदिर, उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बनाने से पूरी होती मनोकामना

आज हम आपको मां प्रचीन मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जो कि करीब आज 550 वर्ष पूर्व स्थापित किया गया था।

Sharadiya Navratri 2023: मप्र में है मां जालपा का 550 साल पुराना मंदिर, उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बनाने से पूरी होती मनोकामना

Sharadiya Navratri 2023: आज से शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं  की भीड़ लग रही है।

आज हम आपको मां प्रचीन मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जो कि करीब आज 550 वर्ष पूर्व स्थापित किया गया था।

मप्र के राजगढ़ के हाइवे 52 के समीप विशाल टेकरी पर बना है। भील राजाओं द्वारा सिद्धपीठ मां जालपा जी की स्थापना की गई थी।

उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बनाने से पूरी होती है मनोकामना

इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर उल्टा स्वास्तिक चिन्ह बानाने से लोगों की मनोकमना पूरी होती है।

यहां पर भक्तों द्वारा अपने काम पूरे करवाने के लिए माता रानी के दरबार में स्वस्तिक बनाने के साथ ही पत्थरों के मकान भी बनाए जाते हैं।

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भक्तों द्वारा मंदिर की दीवारों पर हजारों की संख्या में स्वास्तिक बना रखे हैं। जबकि मंदिर के आसपास व पहा़ड़ी पर ब़डी संख्या में कार्य सिद्ध होने की मांग को लेकर स्वस्तिक भी बनाए जाते हैं।

इसलिए इस मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। न केवल नवरात्रि में बल्कि सालभर मां के दरबार में लोग आते हैं। साथ ही यहां पर पड़ोंसी राज्य राजस्थान से भी लोग आते हैं।

भील राजाओं ने की मंदिर की स्थापना

यहां के स्थानील लोगों का कहना है कि राजगढ़ पर पहले भील राजाओं का शासन था। इन्हीं राजाओं ने पहाड़ी पर मां के चबूतरे की स्थापना की थी।

समय के साथ यहां पर परिवर्तन हुआ और अब यहां पर मां का विशाल मंदिर बन गया है।

मंदिर में अब भक्तों के लिए हुए विशेष व्यस्थाएं

साथ ही प्रशासन के सहयोग और मंदिर ट्रस्ट ने यहां पर आने वाले भक्तों के लिए तमात तरह की व्यस्थाएं भी की हैं।

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जिनमें मंदिर पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां, सड़क लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था आदि के उचित प्रबंध किए गए हैं।

 मंदिर से जुड़ी अनोखी मान्यता

साथ ही इस मंदिर की एक और अनोखी मान्यता है जब भी यहां के लोगों के विवाह के मुहुर्त नहीं निकलते हैं तो लोग मां के दर पर पांती रखने के साथ विवाह संपन्न किए जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि यहां की पांती बिना किसी मुहूर्त का शुभ मुहूर्त होता है।

शादी करने के बाद जरूर दोनों पक्षों के लोग दूल्हा-दुल्हन सहित यहां मातारानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

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