माधवराव सिंधिया का वो किस्सा, जब वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए थे

माधवराव सिंधिया का वो किस्सा, जब वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए थे

मध्यप्रदेश की राजनीति देश में अपनी अलग पहचान रखती है। क्योंकि प्रदेश की राजनीति के किस्से आज भी लोगों की जुंबान पर हमेशा बने रहते है। ऐसा ही एक रोचक किस्सा मध्यप्रदेश की सियासत से जुड़ा हुआ है। जिसे आज हम आपको बताने जा रहे है। दरअसल, माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) ने 26 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। इसके बाद से वह लगातार चुनाव जीतते रहे। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में भी माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) ने गुना से दोबारा जीत दर्ज की थी। उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों भाजपा में हैं लेकिन उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से हुई। पिता माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) का झुकाव हमेशा से ही कांग्रेस की तरफ रहा है। इसके चलते उनकी अपनी मां विजयराजे सिंधिया से भी कई मौको पर ठन गई थी। 10 मार्च, 1945 को मुंबई में जन्में माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) का विवाह 8 मई, 1966 को माधवी राजे सिंधिया से हुआ था। इस दंपत्ति का एक पुत्र और एक पुत्री थी। पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया को सभी जानते हैं लेकिन पुत्री का नाम चित्रांगदा सिंधिया है।

प्रदेश समेत देश की राजनीति में शुमार रहे माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) का निधन 30 सितम्बर, 2001 को हवाई दुर्घटना में हो गया था। माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनके जीवन में ऐसा दौर भी आया जब उनके लिए मध्य प्रदेश जाने के लिए एक चार्टर विमान स्टैंडबाय पोजिशन पर खड़ा रहता था क्योंकि उन्हें लगता था कि वो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन मुख्यमंत्री बने दिग्विजय सिंह।

दो बार मुख्यमंत्री बनते-बनते चूके थे !

माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) की दो बार ताजपोशी होते-होते रह गई थी। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 1989 में चुरहट लॉट्री कांड के समय अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और उन पर इस्तीफा देने का काफी दबाव था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की इच्छा थी कि माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) को मुख्यमंत्री बनाया जाए लेकिन अर्जुन सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया था। जिसकी वजह से अर्जुन सिंह को राजीव गांधी की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी। इसके अलावा उनके जीवन में एक मौका और आया जब माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के चलते मध्य प्रदेश की सुंदरलाल पटवा सरकार को बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद 1993 में मध्य प्रदेश में चुनाव हुए और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने टिकट बांटे। इस चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। उस वक्त कांग्रेस को 320 में से 174 सीटें मिली थी। चर्चा छिड़ गई कि मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए तब तीन लोगों का नाम काफी ज्यादा चल रहा था। उसमें श्यामा चरण शुक्ल, माधवराव सिंधिया, सुभाष यादव शामिल थे।

स्टैंडबाई पोजिशन पर रखा गया विमान

कहा जाता है कि माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के लिए दिल्ली में एक विमान स्टैंडबाई पोजिशन पर रखा गया था। क्योंकि माधवराज सिंधिया (Madhavrao Scindia) को कभी भी सीएम बनाने के लिए भोपाल बुलाया जा सकता था। लेकिन नरसिम्हा राव ने इन तमाम लोगों को अनदेखा करते हुए दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। यह भी बता दें कि सबसे दिलचस्प लड़ाई तो साल 1984 के लोकसभा चुनाव में हुई। भाजपा के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से चुनावी मैदान में उतरे। ऐसे में कांग्रेस ने अंतिम समय पर माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के नाम का पासा फेंका और उन्हें ग्वालियर से अपना उम्मीदवार बना दिया था। इस चुनाव में भी माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) ने जीत दर्ज की और उन्हें इसका तोहफा भी मिला। माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) को पहली बार रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी।

कहते है कि सिंधिया (Madhavrao Scindia) और गांधी परिवार के बीच काफी अच्छे संबंध रहे। माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के कांग्रेस में शामिल होने के पीछे इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का हाथ बताया जाता है। संजय गांधी की वजह से ही माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद फिर माधवराव सिंधिया (Madhavrao Scindia) के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी की मित्रता के भी कई किस्से सुनने को मिलते हैं। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में हैं।

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