स्वदेशी कोरोना वैक्सीन को बनाने वाले डॉक्टर 'कृष्णा एला' की कहानी, पहले भी कई टीका को कर चुके हैं विकसित

COVAXIN: स्वदेशी कोरोना वैक्सीन को बनाने वाले डॉक्टर ‘कृष्णा एला’ की कहानी, पहले भी कई टीका को कर चुके हैं विकसित

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Image source- @BharatBiotech

नई दिल्ली। रविवार को सरकार ने देश में दो कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। जिसमें से पहला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का कोविशिल्ड (Covishield) और दूसरा भारत बायोटेक का कोवाक्सिन (covaxin) शामिल है। कोविशिल्ड को सीरम इंस्टीट्यूट ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाया है। जबकि कोवाक्सिन पूर्ण रूप से स्वदेशी है। आज हम इसी वैक्सीन को अपने देख रेख में बनाने वाले डॉ कृष्णा एला के बारे में जानेंगे।

1996 में कंपनी को किया गया था स्थापित

कृष्णा एला भारत बायोटेक कंपनी के संस्थापक हैं और जीव विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान वैज्ञानिक हैं। उन्होंने विस्कॉन्सिन मेडिसन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। कई सालों तक विदेशों में नौकरी करने के बाद एला वापस अपने देश लौट आए। उन्हें अपने देश और समाज के लिए कुछ करना था। यही कारण रहा कि 1996 में उन्होंने वापस आते ही हैदराबाद से 50 किलोमीटर दूर जीनोम घाटी में भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (Bharat Biotech International Limited) नाम की एक कंपनी डाली। इस काम में उनकी पत्नी ने भी साथ दिया। उस समय कंपनी को स्थापित करने में कृष्णा एला को लगभग 13 करोड़ रूपए लगे थे। आज की तारीख में कंपनी 500 करोड़ के टर्नओवर को पार कर गई है।

पहले भी कई वैक्सीन को कर चुके हैं विकसित

बतादें कि भारत बायोटेक कंपनी वैक्सीन के मामले में एक कामयाब कंपनी मानी जाती है। इससे पहले भी भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ‘एच1एन1, जापानी एन्सेफलाइटिस, चिकनगुनिया, जीका, रोटावायरस और टाइफाइड’ के लिए वैक्सीन विकसित कर चुकी है और सभी का नेतृत्व डॉ कृष्णा एला ने ही किया है।

सरकार ने कृष्णा एला को केंद्रीय मंत्रिमंडल की वैज्ञानिक सलाहकार समिति का भी हिस्सा बनाया था। इसके साथ ही वो कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के बोर्ड ऑफ विजिटर्स में भी शामिल हैं।

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