MP के तीसरे मुख्यमंत्री ‘कैलाशनाथ काटजू’ की कहानी, जिनकी एक शर्त ने भोपाल को दिया बिड़ला मंदिर

Kailashnath Katju

भोपाल। आज हम स्टोरी ऑफ द डे में बात करने वाले हैं। मध्य प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू के बारे में। उनका जन्म कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में 17 जून, यानी कि आज ही के दिन 1887 में मध्य प्रदेश के मालवा ‘जओरा’ में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित त्रिभुवननाथ काटजू था। बचपन में काटजू अपने ननिहाल लाहौर में रहा करते थे। यहीं से उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी हुई। बी.ए की पढ़ाई के बाद वे कानून की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद आ गए।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे

कैलाशनाथ काटजू बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। लोग उन्हें प्रसिद्ध वकील और तेज तर्रार नेता के रूप में जानते थे। काटजू को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का करीबी माना जाता था। यही नहीं वें भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के भी करीबी थे। तभी तो उन्हें यूपी की पहली सरकार में मंत्री बनाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मनाया था। कैलाशनाथ काटजू भारत के एक प्रमुख राजनेता थे। वे उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री भी रहे। काटजू को पहली लोकसभा का सदस्य बनने का भी गौरव प्राप्त था।

मंदिर के लिए जब काटजू ने रख दी शर्त

कैलाशनाथ काटजू को लेकर एक कहानी काफी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जब वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में तेजी से काम करना शुरू किया। सबसे पहले उनका फोकस भोपाल को सजाने और संवारने पर था। काटजू चाहते थे कि भोपाल की अरेरा हिल्स की पहाड़ी पर एक विशाल मंदिर बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने पहाड़ी पर जमीन अलॉट कर एक ट्रस्ट बनाया। वे चाहते थे कि भोपाल में बनने वाला यह मंदिर इतना सुंदर और भव्य हो कि इसकी पहचान पूरे भारत में हो। लेकिन तब इस ट्रस्ट में ज्यादा लोग जुड़ नहीं पाए थे। इसी बीच भारत के प्रसिद्ध और औद्योगिक बिड़ला घराने ने मध्यप्रदेश में निवेश की इच्छा जताई। काटजू ने उनकी बात तो मान ली, लेकिन उन्होंने उनके सामने एक शर्त रखी दी।

शर्त ये है कि अगर बिड़ला परिवार मध्य प्रदेश में निवेश करता है तो उन्हें भोपाल के अरेरा हिल्स की पहाड़ी पर भव्य मंदिर बनाना होगा। इस शर्त को बिड़ला परिवार ने मान लिया और तीन साल के अंदर अरेरा हिल्स की पहाड़ियों पर भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। लोग आज इस मंदिर को बिड़ला मंदिर के नाम से जानते हैं।

अपना कार्यकाल पूरा करने वाले मप्र के पहले सीएम

काटजू मप्र के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। दरअसल, मध्य प्रदेश के गठन के बाद प्रदेश के पहले दो मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल और भगवतराम मंडलोई को जल्द ही अपना पद छोड़ना पड़ा था। ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने करीब कैलाशनाथ काटजू को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद 1957 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मप्र में बड़ी जीत हासिल की। काटजू दोबारा मुख्यमंत्री बने और वे पांच साल तक लगातार राज करने वाले मप्र के पहले सीएम बन गए।

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