भारत के सबसे अमीर मंदिर की कहानी, जानिए यहां क्यों किया जाता है बालदान?

भारत के सबसे अमीर मंदिर की कहानी, जानिए यहां क्यों किया जाता है बालदान? The story of India's richest temple, know why hair donation is done here? nkp

भारत के सबसे अमीर मंदिर की कहानी, जानिए यहां क्यों किया जाता है बालदान?

नई दिल्ली। देश भर में कई ऐसे मंदिर हैं जो काफी समृद्ध माने जाते हैं। लेकिन अगर देश के सबसे अमीर मंदिर (richest temple in the country) की बात करें तो तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर (Tirupati Venkateswara Temple) के सामने सभी मंदिर कमाई के मामले में बौने हैं। इसे देश का सबसे अमीर मंदिर कहा जाता है। इसके अलावा इस मंदिर की एक और मान्यता है जो इसे देश भर के अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। मंदिर में प्राचीन समय से ही बाल दान करने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे एक कहानी है। ज्यादातर लोग इस चीज के बारे में नहीं जानते हैं। चलिए आज हम आपको इसी परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में बताते हैं।

लोग क्यों करते हैं बाल दान?

मान्यता है कि यहां जो लोग जितनी कीमत के बाल दान करते हैं, भगवान उससे 10 गुना अधिक कीमत धन के रूप में उसे लौटाते हैं। यानी जो लोग यहां आकर अपना बाल दान करते हैं, ताउम्र उसके उपर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस मंदिर में केवल पुरूष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी अपनी मनन्त पूरी होने पर बाल दान करती हैं।

बाल दान करने के पीछे की कहानी

प्राचीन काल की बात है। एक बार बाला जी विग्रह पर चीटियों का पहाड़ बन गया। तब वहां एक गाय आया करती थी, जो चीटियों के पहाड़ पर दूध देखर जाती थी। जब उसके मालिक को इस बात का पता चला तो उसे अपनी गाय पर बेहद गुस्सा आया और उसने एक दिन कुल्हाड़ी से बाला जी विग्रह पर वार कर दिया। इस वार से बाला जी को घाव हो गया और उनके बहुत से बाल गिर गए।

नारायण ने प्रसन्न होकर क्या कहा?

ऐसे में मां नीला देवी वहां पहुंची और अपने बाल काटकर बालाजी के घाव पर रख दीं। कथाओं के अनुसार जैसे ही नीला देवी ने घाव पर अपना बाल रखा बालाजी का घाव भर गया। इससे प्रसन्न होकर नारायण ने कहा कि बाल महिला के शरीर की सुंदरता का सबसे प्रमुख हिस्सा होता है, लेकिन देवी आपने इसे मेरे उपर त्याग कर दिया। इसलिए आज से जो भी व्यक्ति मेरे उपर अपने बालों का त्याग करेगा, मैं उसकी हर इच्छा पूरी करूंगा।

6 हजार नाई इस काम को करते हैं

माना जाता है इसी घटना के बाद बालाजी के मंदिर में केश दान करने की मान्यता प्रारंभ हुई। इस मान्यता से जुड़ी अन्य किंवदंतियों की मानें तो इस दान के द्वारा भगवान वेंकटेश्वर कुबेर जी से लिए गए अपने ऋष को चुकाते हैं।लोक मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन की बुराईयों आदि के छोड़कर इस मंदिर में आकर अपने केशों का त्याग करता है, देवी लक्ष्मी उसके जीवन में से समस्त प्रकार के दुखों को दूर कर देती हैं, बता दें इस मंदिर में इस काम को करने से लगभग 6000 नाइयों को नियुक्त किया गया है।

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