एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अशोक सिंह भदौरिया की कहानी, जिनकी डार्लिंग ने 116 डाकुओं का शिकार किया

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अशोक सिंह भदौरिया की कहानी, जिनकी डार्लिंग ने 116 डाकूओं का शिकार किया

Ashok Singh Bhadoria

भोपाल। आज हम स्टोरी ऑफ दे डे में बात करने वाले हैं एनकांउटर स्पेशलिस्ट अशोक सिंह भदौरिया की। मध्य प्रदेश पुलिस के डीएसपी पद से रिटायर्ड हुए भदौरिया के कारनामों की लिस्ट काफी लंबी है। उन्होंने अपने करियर में कुल 116 एनकाउंटर किए हैं। एक जमाना था जब उनके नाम मात्र से दुर्दांत डकैत, माफिया और गैंगस्टर थर्राते थे। उन्होंने दर्जनों गैंग का सफाया चंबल और ग्वालियर के बीहड़ों से किया।

डाकूओं के लिए काल थे भदौरिया

किसी फिल्मी स्टोरी की तरह उनकी पूरी कहानी है। कहा जाता है कि उनकी ‘डार्लिंग’ यानी कि उनके एके-47 के सामने जो आया वो इस दुनिया से गया। मप्र, राजस्थान और यूपी से लगे कभी चंबल के इलाके में डाकूओं का आतंक हुआ करता था। लोग शाम होते ही अपने घरों में कैद हो जाते थे। पुलिस भी इन इलाकों में जाने से डरती थी। लेकिन भदौरिया इन इलाकों में भी डाकूओं के लिए काल बन जाते थे। उन्होंने चुन-चुनकर इन इलाकों से डाकुओं को खत्म किया।

भदौरिया एके-47 लेकर जंगलों में बेखौफ घूमा करते थे

दायराम गड़रिया गैंग, बेजू गड़रिया गैंग, रामबाबू गड़रिया गैंग, रघुवर गड़रिया गैंग और ना जाने कितने ही गैंग को इन्होंने खत्म किया। अशोक सिंह भदौरिया जब भी शिकार पर निकलते थे, अपने साथ एके-47 लेकर जरूर जाते थे। इस हथियार को वह प्यार से ‘डार्लिग’ कहा करते थे। उनकी गाड़ी जैसे ही चंबल के इलाके में जाती, डाकुओं में हड़कंप मच जाता। भदौरिया एके-47 लेकर जंगलों और पहाड़ो में बेखौफ घूमा करते थे। इस दौरान अगर कोई डाकू उनके सामने आ जाता तो वो चाहे सरेंडर करता या फिर डार्लिंग का शिकार हो जाता।

विवादों में भी रहा नाम

हालांकि भदौरिया का नाम इस दौरान कई विवादों के साथ भी जुड़ा। 2002 में एक मुठभेड़ के दौरान एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में अशोक भदौरिया के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था। लेकिन साल 2004 में कोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया था। इतना ही नहीं तकरिबन 16 बार राष्ट्रपति के पास उनका नाम राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भेजा गया, लेकिन हर बार पदक नहीं मिला।

आरक्षक के पद पर हुए थे भर्ती

भदौरिया मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। लेकिन जैसे-जैसे उनके द्वारा डकैतों का सफाया किया गया, वैसे-वैसे उन्हें सिलसिलेवार ठंग से प्रमोशन मिलता गया। पहले प्रधान आरक्षक बने फिर उप निरीक्षक, टीआई और अंत में उप पुलिस अधीक्षक के पद से वह रिटायर्ड हुए। अशोक सिंह भदौरिया मूलत: भिंड जिले के किशनपवरा गांव के रहने वाले हैं।

Image source- ashoksinghbhadoria.com

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