नये साल पर प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं, लिखी देशवासियों को समर्पित कविता ‘अभी तो सूरज उगा है’ -



नये साल पर प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं, लिखी देशवासियों को समर्पित कविता ‘अभी तो सूरज उगा है’

नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नये साल के आगमन पर देशावासियों को शुभकामनाएं दीं और साथ ही एक कविता भी साझा की जिसके माध्यम से उन्होंने अंधेरों और मुश्किलों को पीछे छोड़ कर नये संकल्पों व नयी उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

देशवासियों को समर्पित इस कविता का शीर्षक है ‘‘अभी तो सूरज उगा है’’।

ज्ञात हो कि कोविड-19 महामारी की वजह से पिछले साल लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा । कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया तो कई लोगों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

प्रधानमंत्री ने अपनी कविता के माध्यम से लोगों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की और देशवासियों को नई ऊर्जा और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री की यह कविता नागरिकों को सरकार से जुड़ने और सुशासन के लिए योगदान देने का अवसर प्रदान करने वाले डिजिटल मंच ‘‘माई गॉव’’ की ओर से ट्वीटर पर साझा की गयी।

कविता का वीडियो साझा करते हुए ट्वीट में कहा गया, ‘‘नये साल के पहले दिन की शुरुआत हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिखित तथा मंत्रमुग्ध व प्रोत्साहित कर देने वाले गीत ‘अभी तो सूरज उगा है’ से करते हैं।’’

मोदी ने कई लोगों की नए साल की शुभकामनाओं का जवाब भी दिया, जिनमें पार्श्व गायिका महान लता मंगेशकर भी शामिल हैं।

एक ट्वीट के जवाब में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत सुशासन की दिशा में अपने प्रयासों को जारी रखेगा, नए साल में संपूर्ण देश के लोग इससे लाभान्वित होंगे।

इससे पहले एक कार्यक्रम में, उन्होंने मंत्रालयों के महत्त्व पर जोर दिया और कहा कि वे सुस्त ढांचे न हों, बल्कि स्टार्टअप की तरह फिट रहें।

इससे पहले, मोदी ने नये वर्ष के आगमन पर देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा उनके सुख, समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना की।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आप सभी को वर्ष 2021 की बधाई। यह साल आपके जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। उम्मीद और कल्याण की भावना प्रबल हो।’’

भाषा कृष्ण रंजन

रंजन

Share This

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password