राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों से कारोबारी मॉडल, ज्ञान, निवेश के जरिये भारत में बदलाव लाने में योगदान देने को कहा

नयी दिल्ली, 9 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि देश के वैज्ञानिकों एवं तकनीकीविदों द्वारा दो ‘कोविड टीकों’का विकास आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी उपलब्धि है जो वैश्विक हित एवं सलामती की भावना से प्रेरित है । उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपने विचारों, कारोबारी मॉडल, निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता एवं ज्ञान के जरिये भारत के बदलाव में योगदान देने के लिये कहा ।

राष्ट्रपति ने 16वें प्रवासी भारतीय दिवस समारोह को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी की वृहद चुनौतियों से मुकाबला करने के वैश्विक प्रयासों में भारत अग्रणी रहा है ।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमने करीब 150 देशों को दवाएं आपूर्ति की और दुनिया को भारत को फार्मेसी के स्थल के रूप में देखने को प्रेरित किया । ’’

कोविंद ने कहा, ‘‘ हमारे वैज्ञानिकों एवं तकनीकीविदों द्वारा दो‘कोविड टीकों’के विकास की हाल की सफलता, आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी उपलब्धि है और यह दुनिया के हित और सलामती की भावना से प्रेरित है । ’’

राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों से कहा, ‘‘ मैं आपको अपने विचारों, कारोबार मॉडल, निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता एवं ज्ञान के जरिये भारत के बदलाव की कहानी का हिस्सा बनने के लिये आमंत्रित करता हूं । ‘‘

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण यात्रा संबंधी गंभीर बाधाएं उत्पन्न हुई । ‘‘ मैं भारतीय समुदाय तक पहुंचने और ऐसे कठिन समय में यात्रा सुविधाएं प्रदान करने के लिये विदेश मंत्रालय और विदेशों में हमारे मिशन की भूमिका की सराहना करता हूं । ’’

कोविंद ने कहा कि आज दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 3 करोड़ भारतीय समुदाय की आबादी है और इस संदर्भ में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारतीय समुदाय के लिये सूर्य कभी अस्त नहीं होता ।

प्रवासी भारतीय दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 1915 में इसी दिन सबसे महानतम प्रवासी भारतीय महात्मा गांधी भारत लौटे थे।

कोविंद ने कहा कि महात्मा गांधी ने हमारे सामाजिक सुधारों और स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक आधार प्रदान किया और अगले तीन दशकों में बुनियादी तौर पर भारत को कई तरह से बदलने का काम किया ।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सोच ने भारतीय समुदाय से संबंधों को नयी ऊर्जा प्रदान की और जब वे प्रधानमंत्री थे जब साल 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह शुरू हुआ ।

उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज के नाम पर प्रवासी भारतीय केंद्र का नामकरण करना प्रवासी भारतीय समुदाय को लेकर उनके बहुमूल्य योगदान का प्रतीक है ।

भाषा दीपक

धीरज उमा

उमा

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password