होली का नाम लेते ही डर जाते हैं गांव के लोग, 150 साल से नहीं पड़े रंग

कोरबा: होली एक ऐसा त्योहार है जिसका इंतजार हर वर्ग के लोग करते हैं। बूढ़ों से लेकर बच्चों तक सभी इस त्योहार को मनाने के लिए उत्साहित रहते हैं। लेकिन हम आपको एक ऐसा गांव बताते हैं जहां कभी न तो होली जलाई गई और न ही कभी इस गांव में रंग उड़े, तो इस गांव में ऐसा क्या हुआ था जिससे ये परंपरा बंद कर दी गई।

कोरबा से 35 किलोमीटर की दूरी पर है खरहरी गांव। इस गांव की खास बात ये है कि यहां कभी होली का त्योहार नहीं मनाया जाता और न ही यहां कभी होली जलाई जाती। जब भी इस गांव के लोगों से होली की बात करो तो इनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। बड़ी बात ये भी है कि यहां पिछले 150 सालों से होली के दिन सन्नाटा पसरा रहता है न तो कोई खुशियां मनाता है और न ही फागुन के रंग इस गांव पर चढ़ते हैं। गांव के बच्चे तो होली को शायद जानते भी नहीं है।

गांव के लोग बताते हैं कि एक बार इस गांव में होली मानने की कोशिश की गई थी। दरअसल कई साल पहले गांव में कुछ बाहरी लोग आए थे जिन्होंने होलीका दहन किया था लेकिन उसके बाद गांव में अंगारे बरसने लगे थे। घरों में आग लग गई थी और गांव में अफरा तफरी मच गई थी। लोग कहते हैं कि गांव के मड़वादेवी का मंदिर हैं और मड़वादेवी नहीं चाहती कि इस गांव में कभी होली खेली जाए।

जहां फागुन का महीना लगते ही मौसम भी मस्ती में गुलजार हो जाता है बाजार भी रंगों से भर जाते हैं लेकिन वहीं खरहरी गांव ऐसा है जहां होली नहीं मनाई जाती। हालांकि इस समय में गांव के लोगों का ये तर्क भले ही अंधविश्वास लगे लेकिन गांव के लोगों का डर इस रहस्य को और गहराता है।

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