चुनाव चिन्ह आवंटन के अधिकार वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने आयोग से छह हफ़्ते में मांगा जवाब

लखनऊ, पांच जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने चुनाव आयोग को चुनाव चिन्ह आवंटन के अधिकार प्रदान करने वाले ‘सिंबल आर्डर’ को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर छह सप्‍ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 17 फरवरी की तारीख तय की है।

यह आदेश मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति गोविंद माथुर व न्‍यायमूर्ति रमेश सिन्‍हा की पीठ ने श्रद्धा त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया है।

याचिका में त्रिपाठी की ओर से कहा गया था कि सिंबल आर्डर के 1968 के पैराग्राफ 10 , 10 ए व 10 बी (तीनों पैराग्राफ) के तह‍त चुनाव आयोग स्‍वयं चुनाव चिन्ह आवंटित करता है जबकि कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 के पैरा 10 के अनुसार यह कार्य चुनाव अधिकारी का है। याचिका में कहा गया कि सिंबल आर्डर के रूल्स 1961 के प्रावधानों के विपरीत होने के कारण इसे रद्द किया जाए।

याची ने कहा कि सिंबल आर्डर का प्रावधान होने के कारण चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को तो पहले से ही चुनाव चिन्ह आवंटित कर देता है किंतु निर्दलीय प्रत्याशियों को यह चिन्ह नामांकन के बाद ही मिल पाता है।

याचिका का विरोध करते हुए चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है और यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका है।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि हमें उचित लगता है कि इस प्रकरण में आयोग का प्रतिशपथ-पत्र दाखिल होना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने आयेाग को छह सप्ताह में प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दे दिया।

भाषा सं आनन्‍द प्रशांत

प्रशांत

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