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70-80 के दशक में कैसे होते थे पिताजी: कैसे हैं 90 के दशक के पापा, जमाना नया हो या पुराना डैडी हमेशा हैं रोटी,कपड़ा,मकान

Father’s Day 2024:किसी भी व्यक्ति के जीवन में पिता की भूमिका अहम मानी जाती है।हर साल जून के तीसरे रविवार को ‘फादर्स डे’ के रूप में मनाते हैं।

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Kalpana Madhu
70-80 के दशक में कैसे होते थे पिताजी: कैसे हैं 90 के दशक के पापा, जमाना नया हो या पुराना डैडी हमेशा हैं रोटी,कपड़ा,मकान

Father’s Day 2024: किसी भी व्यक्ति के जीवन में पिता की भूमिका अहम मानी जाती है। हर साल जून के तीसरे रविवार को ‘फादर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पिता और बच्चे के बीच के अटूट बंधन और समाज में उनके महत्व को दर्शाने के लिए मनाया जाता है।

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आज हम इस आर्टिकल में पढ़ेंगे की आजकल की पीढ़ी जो हाल में पिता के सुख का अनुभव कर रहे हैं वो पहले के पिता से कितने अलग थे।

70-80 का दशक VS 90 का दशक 

ये वो दौर था जब घर में पापा से ज्यादातर खौफ का माहौल होता था। बच्चे हर बात कहने से डरा करते थे । या यूं कहें तब एक पिता के जुबान से निकली हर एक शब्द पत्थर की लकीर मानी जाती थी।पिता से हमारी बचपन की यादों और प्यार के साथ-साथ एक डर भी जुड़ा रहता था।

आज के दौर के बच्चे अपने पापा से हर बात बेधड़क कहते हैं। आज के पिता खुले विचारों के होते हैं। समय के साथ हर एक रिश्ता बदल चुका है। एक पिता और उसके बच्चे के बीच का रिश्ता भी वक्त के साथ काफी बदल गया है।

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पुराने समय के पिता होते थे परंपरावादी

आज के पिता और पुराने समय के पिता में बहुत अंतर है। आज के पिता अपने बच्चों के साथ अधिक खुले और साझेदाराना रिश्ते बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं पुराने समय के पिता अक्सर अधिक परंपरागत और नियमित रहते थे। आज के पिता अपने बच्चों की भावनाओं और सपनों को समझते हैं और उन्हें उनकी पसंद के अनुसार स्वतंत्रता देते हैं।

आज के पापा दिखाते हैं साझेदारी

आज के पिता और पुराने समय के पिता के बीच कुछ मुख्य अंतर हैं। आज के पिता अक्सर अपने बच्चों के साथ साझेदारी और उनकी भलाई के लिए समर्पित रहते हैं, जबकि पुराने समय के पिता अक्सर अधिक प्राधान्य देने वाले थे और पारंपरिक भूमिकाओं के अनुसार ही चलते थे।

आज के पिता अक्सर अपने बच्चों के भविष्य के प्रति अधिक सहयोगी और खुले मन से नजर आते हैं, जबकि पुराने समय के पिता अक्सर अपनी पीढ़ी को संबंधों और परंपरागत विचारधारा के अनुसार प्रेरित करते थे।

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हर जमाने के डैडी हैं अपने बच्चों के लिए खास 

1970-80 के दशक के पिता की खासियतें बहुत ही अनूठी और माननीय थीं। वो बच्चों के साथ-साथ अपने परिवार के प्रति अपनी समर्पितता और सामर्थ्य दिखाई है। वे अक्सर अपने बच्चों के सपनों और महत्वपूर्ण प्रश्नों को समझते थे, और उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करते थे।

आज के दशक में पिता की खासियतें भी अनूठी हैं। वे अक्सर अपने बच्चों के साथ साझेदारी और समर्थन का भाव रखते हैं। आजकल के पिता की अपने बच्चों के सपनों और उनकी भावनाओं को समझने की क्षमता और सहानुभूति बहुत ही अच्छी होती है। वे अपने बच्चों को स्वतंत्रता और समय देते हैं, जिससे उनकी विकास में मदद मिलती है।

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