सभी बाल विवाह को सिरे से अमान्य ठहराने की मांग वाली अर्जी पर अदालत ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में हुए सभी बाल विवाह को सिरे से अमान्य (अवैध) करार देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सोमवार को आप सरकार से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया और एक महिला की याचिका पर उसका रुख जानना चाहा। याचिकाकर्ता एक महिला ने उसके नाबालिग रहने के दौरान कथित रूप से की गयी उसकी शादी को अमान्य करार देने का भी अनुरोध किया है।

अदालत ने महिला के पिता, भाई और उसके पति से मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 फरवरी से पहले जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता के वकील तनवीर अहमद मीर ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी है जो नाबालिगों की शादी को तभी शून्यकरणीय मानता है, जब दोनों में से एक ने ऐसी मांग की हो और वह शादी के वक्त नाबालिग रहा हो।

याचिकाकर्ता ने अदालत से दरख्वास्त की है कि प्रदेश में हर बाल विवाह को सिरे से अमान्य ठहराया जाए।

मीर ने अदालत से कहा कि उनकी मुवक्किल की अप्रैल 2010 में जब शादी हुई थी तब वह नाबालिग थी और उससे पहले वह किसी अज्ञात स्थान पर रह रही थी क्योंकि उसे आशंका थी कि उसके परिवार वाले उससे जबरन शादी के लिए हां करवा लेंगे।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसकी शादी उसकी मौसी के बेटे से करवा दी गयी। उसका यह भी दावा है कि वह 10 दिसंबर, 1993 को पैदा हुई थी और जब अप्रैल, 2010 में उसका ब्याह कराया गया तब उसके पास इसके लिए हां करने के सिवा कोई चारा नहीं था क्योंकि वह दसवीं के परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रही थी और अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ नहीं जा सकी।

महिला ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हुए वह अपने माता-पिता के साथ 19 दिसंबर 2020 तक शांति से रह रही थी कि उसका पति उसे अपने साथ गुजरात ले जाने के लिए आया और जब उसने विरोध किया तब उसके भाई ने उसके पति के इशारे पर सभी के सामने उसकी कथित रूप से पिटाई की। तब से वह भागती फिर रही है। उसने सुरक्षा भी मांगी है।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप

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