Thackeray vs Shinde: मुंबई के अंधेरी ईस्ट उपचुनाव से पहले ठाकरे और शिंदे गुट को झटका, नहीं कर पाएंगे पार्टी चिन्ह का इस्तेमाल

Thackeray vs Shinde: मुंबई के अंधेरी ईस्ट उपचुनाव से पहले ठाकरे और शिंदे गुट को झटका, नहीं कर पाएंगे पार्टी चिन्ह का इस्तेमाल

Thackeray vs Shinde: जब से महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने बगावत कर सरकार बनाई है तभी से महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में हलचल सी मची हुई है। जैसे ही शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनें, उसके बाद उन्होंने अपने गुट को असली शिवसेना (जिसका चुनाव चिन्ह धनुष और बाण है) करार दिया था। जिसको लेकर चुनाव आयोग दोनों गुट से शुक्रवार तक अपने-अपने सबूत जमा करने को कहा था। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को फैसला दिया कि आगामी 3 नवंबर से होंने वाले मुंबई के अंधेरी ईस्ट उपचुनाव में दोनों गुट चुनाव तो लड़ सकेंगे लेकिन पार्टी (धनुष और बाण) का इस्तेमाल नहीं कर सकते है। ऐसे में खासकर इस फैसले से ठाकरे गुट को ज्यादा परेशानी हुई होगी। क्योंकि जिसने पार्टी खड़ी की, आज उसके चुनाव चिन्ह को लेकर मतभेद हो गया है।

शिवसेना के पार्टी चिन्ह के बवाल के बीच चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि दोनों में से कोई भी गुट पार्टी चिन्ह (धनुष और बाण) का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जो कि शिवसेना के लिए रिजर्व था। ये फैसला तब आया है जब दोनों गुट के बीच पार्टी चिन्ह को लेकर मतभेद है।

क्या कहा चुनाव आयोग ने

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा, "दोनों प्रतिद्वंद्वी समूहों को एक समान स्थिति में रखने और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए, और पिछली प्राथमिकता के आधार पर, आयोग इसके उद्देश्य को कवर करने के लिए निम्नलिखित अंतरिम आदेश देता है। वर्तमान उप-चुनाव और प्रतीक आदेश के पैरा 15 के अनुसार मामले में विवाद के अंतिम निर्धारण तक जारी रखने के लिए: - एकनाथराव संभाजी शिंदे (याचिकाकर्ता) के नेतृत्व में दो समूहों में से कोई भी और अन्य उद्धव ठाकरे (प्रतिवादी) के नेतृत्व में नहीं है। पार्टी के नाम का उपयोग करने की अनुमति दी जाए शिवसेना सरल।"

"दोनों समूहों में से किसी को भी "शिवसेना" के लिए आरक्षित "धनुष और तीर" प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी; दोनों समूहों को ऐसे नामों से जाना जाएगा जो वे अपने लिए चुन सकते हैं। आयोग ने आगे कहा कि आगामी उपचुनाव को देखते हुए दोनों समूहों को अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे, जो वे चुन सकते हैं।

गौरतलब है कि शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के एक धड़े ने एमवीए(MVA) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन कर लिया था। तब से,महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच इस बात को लेकर खींचतान चल रही है कि बाल ठाकरे की विरासत का असली उत्तराधिकारी कौन है।

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