हमारी भी सुनो सरकार: प्रदेश के इस जिले में एक जानवर बना किसानों के लिए आफत, सारी कोशिश हुई नाकाम; अब ये करेंगे किसान

Terror of Nilgai in MP: नीलगाय यानी घोड़ारोज से हरीभरी फसलें बर्बाद हो रही है। इस वजह से समस्या से छुटकारा नहीं पा रहा किसान

हमारी भी सुनो सरकार: प्रदेश के इस जिले में एक जानवर बना किसानों के लिए आफत, सारी कोशिश हुई नाकाम; अब ये करेंगे किसान

हाइलाइट्स

  • एमपी में नीलगाय का आतंक
  • हरी फसलें हो रही बर्बाद
  • किसान अब करेगा आंदोलन

Terror of Nilgai in MP: मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में किसान एक विशेष जानवर के आतंक से परेशान है।

ये जानवर किसानों के खून पसीने की मेहनत को उनके आंखों के सामने ही बर्बाद कर रहे हैं।

किसान का सब्र का बांध टूट गया है और अब वह बड़े आंदोलन की तैयारी में है।

इस जानवर से परेशान है किसान

मंदसौर, धार सहित अन्य जिलों के किसान नीलगाय (जिसे घोड़ारोज या रोजड़ा कहा जाता है) से परेशान है।

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घोड़ारोज (Terror of Nilgai) किसानों के आंखों के सामने ही उनकी हरीभरी फसलें खराब कर रहे हैं।

इनके आतंक को लेकर किसानों ने कई बार प्रशासन को शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

कुछ ही समय में चौपट हो रही फसल

घोड़ारोज (Terror of Nilgai) खेतों में 20 से 25 के झुंड में आते हैं। इनका वजह काफी ज्यादा होता है।

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ऐसे में ​ये जिस खेत में घुस जाए वहां की फसल बर्बाद होना तय है।

कई बार ये भगाने पर किसानों पर हमला भी कर देते हैं।

धार में कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे किसान

घोड़ारोज यानी रोजड़ा (Terror of Nilgai) से परेशान किसान 21 मई को कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।

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इसके लिए भारतीय किसान संघ गांव-गांव जाकर जनसंपर्क कर रहा है।

हर दिन 5 गांव के किसान देंगे धरना

21 मई को कलेक्टर कार्यालय के घेराव के बाद 22 मई से किसान कलेक्टर कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना देंगे।

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इसके लिए हर दिन पांच गांव के किसान धरना स्थल पर मौजूद रहेंगे।

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50 हजार रुपये मुआवजे की मांग

भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में होने वाले इस अनिश्चित कालीन आंदोलन की प्रमुख मांग घोड़ारोज यानी रोजड़ा (Terror of Nilgai) के आतंक से मुक्ति ही है।

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किसानों की मांग है कि यदि शासन ऐसा नहीं करता है तो वह किसानों फसल नुकसान के बदले 50-50 हजार रुपये का मुआवजा दे।

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इसलिए बढ़ रही इनकी संख्या

एक मादा घोड़ारोज यानी रोजड़ा (Terror of Nilgai) हर 6 महीने में दो से तीन बच्चों को जन्म देती है। इससे इनकी जनसंख्या बढ़ती चली जा रही है।

भारतीय किसान संघ धार के जिलाध्यक्ष हरीश पटेल बताते हैं कि किसान भूंखा मर जाएगा लेकिन जीव हत्या का पाप नहीं लेगा।

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फसल कटाई के समय यदि घोड़ारोज यानी रोजड़ा का बच्चा यदि खेत में बैठा हो तो किसान उसे प्यार से बाहर कर देता है।

कुत्ते का झंड यदि हमला करता है तो किसान अपने आंखों के सामने उसे मरता नहीं देख सकता और वो खुद इस झुंड को भगा देता है।

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