Teacher's Day 2022 : टीचर्स डे आज, जानें कैसे हुई इस दिन को मनाने की शुरूआत, संदेश, भाषण

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Teacher's Day 2022 : टीचर्स डे आज, जानें कैसे हुई इस दिन को मनाने की शुरूआत, संदेश, भाषण

नई दिल्ली। आज पूरे देश में चीटर्स डे Teacher's Day 2022  बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। सभी स्कूलों में छात्र अपने शिक्षकों को शिक्षक दिवस के संदेश दे रहे हैं। साथ ही सभी छात्र अपने गुरू यानि शिक्षक को आदर भरे संदेश दे रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी अपने गुरू को संदेश भेजना चाहते हैं तो हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं ऐसे ही कुछ संदेश। साथ ही जानते है कि इस दिन की शुरूआत कैसे हुई।

संदेश - 

जीवन के हर अंधेरे में,
रोशनी दिखाते हैं आप।
बंद हो जाए सब दरवाजे,
नए रास्ते दिखाते आप।
सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं,
जीवन जीना सिखाते हैं आप।
Happy Teacher's Day 2022

दिया ज्ञान का भंडार मुझे
किया भविष्य के लिए तैयार मुझे
जो किया आपने उस उपकार के लिए
नहीं शब्द मेरे पास आभार के लिए।
शिक्षक दिवस 2022 की शुभकामनाएं!

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय –
आपको बता दें डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने 40 साल से ज्यादा का जीवन शिक्षक के रूप में बिताया था। वे एक महान शिक्षाविद और वक्ता थे लेकिन इसी के साथ ही हिंदू विचारक भी थे। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा थ। उनके पिता पिता सरकारी नौकरी में थे। एक राजस्व विभाग में वैकल्पिक कार्यालय में कार्यरत थे। शिक्षा को लेकर पूर्व राष्ट्रपति के विचार बेहद प्रगतिशील थे।

ऐसे हुई थी टीचर्स डे को मनाने की शुरूआत -
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने छात्रों के हित के बारे में सोचते थे। 1962 से हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने चुना था क्योंकि उनके कुछ छात्र उनके 77 वें जन्मदिन पर कुछ खास करना चाहते थे। उन्होंने इसके बजाय सभी शिक्षकों को श्रद्धांजलि देने के लिए दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया। राष्ट्रपति बनने के बाद छात्रों ने उनका जन्म दिन मनाने की इच्छा प्रकट की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि यह दिवस शिक्षक को समर्पित करके मनाएं। तभी से शिक्षक दिवस मनाने का कार्यक्रम शुरू हुआ।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 10 अनमोल वचन –

शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूसे, बल्कि चुनौतियों के लिए तैयार करें।
भगवान की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके नाम पर बोलने का दावा करते हैं।
शिक्षक के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है।
शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए। जो कठिन परिस्थितियों के विरुद्ध लड़ सके।
किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है।
ज्ञान हमें शक्ति देता है और प्रेम हमें परिपूर्णता देता है।
जीवन का सबसे बड़ा उपहार एक उच्च जीवन का सपना है।
धन, शक्ति और दक्षता केवल जीवन के साधन हैं। खुद जीवन नहीं।
कला मानवीय आत्मा की गहरी परतों को उजागर करती है।
हर्ष और आनंद से परिपूर्ण जीवन केवल ज्ञान और विज्ञान के आधार पर संभव है।

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