Swiss Bank: काला धन जमा करने के लिए लोग स्विस बैंकों को क्यों चुनते हैं? जानिए इसके पीछे का रहस्य

नई दिल्ली। स्विस बैंक (swiss bank)ने जून महीने में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक साल 2020 में भारतीयो ने वहां रिकॉर्डतोड़ पैसे जमा कराए। लगभग 20 हजार 7 सौ करोड़ रूपए। ये आंकड़ा बीते 13 सालों में सबसे ज्यादा है। ज्यादातर लोगों को पता होगा कि स्विस बैंक में लोग काला धन जमा करते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां सिर्फ काला धन ही जमा किया जाता है। लेकिन जो लोग टैक्स चोरी करते हैं उसे छिपाने के लिए स्विस बैंक का सहारा लेते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि काला धन जमा करने के लिए लोग स्विट्जरलैंड और वहां के बैंकों को ही क्यों चुनते हैं?

गजब की गोपनीयता बरतते हैं बैंक

दरअसल, स्विट्जरलैंड के बैंक अपने ग्राहकों और उनकी जमा राशि को लेकर गजब की गोपनीयता बरतते हैं। इस वजह से जो लोग टैक्स चोरी करते हैं उनकी पहली पसंद स्विस बैंक है। बतादें कि स्विस बैंकों के लिए गोपनीयता के कड़े नियम कोई नई बात नहीं है। इन बैंकों ने पिछले तीन सौ साल से ये सीक्रेट छिपाए हुए हैं। वर्ष 1713 में ग्रेट काउंसिल ऑफ जिनेवा ने ये नियम बनाए थे कि बैंक अपने क्लाइंट के रजिस्टर या जानकारी सिटी काउंसिल के अलावा किसी और के साथ साझा नहीं करेगा। अगर बैंकर अपने ग्राहक से जुड़ी जानकारी किसी को देता है, तो ये अपराध की श्रेणी में आता है।

हालांकि अब जांच पड़ताल के बाद ही पैसा रखता है बैंक

गोपनीयता के यही नियम स्विट्जरलैंड को काला धन रखने के लिए सुरक्षित ठिकाना बनाते हैं। यहां पैसा, सोना, ज्वेलरी, पेंटिग या दूसरा कोई भी कीमती सामान जमा कराने पर बैंक कोई भी सवाल नहीं करता। हालांकि अब आतंकवाद, भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी के बढ़ते मामलों की वजह से स्विस बैंक उन खातों के आग्रह को छुकराने लगा है। जिनपर गैर-कानूमी होने का संदेह होता है।

स्विस बैंक में कैसे जमा होता है पैसा?

स्विस बैंक में पैसा कैसे जमा किया जाता है इससे पहले आपको इसमें खाता कैसे खोला जाता है ये जानना चाहिए। स्विस बैंक में 18+ कोई भी व्यक्ति खाता खोल सकता है। हालांकि अब बैंक को अगर शक हो जाता है कि पैसा जमा कराने वाला व्यक्ति किसी खास सियासी मकसद के लिए खाता खुलवा रहा है और उसमे जमा कराया जा रहा पैसा गैर-कानूनी है, तो वो आवेदन खारिज कर सकता है।

गोपनीय खातों को नंबर्ड एकाउंट कहा जाता है

मालूम हो कि स्विट्जरलैंड में करीब 400 बैंक हैं, जिनमें यूबीएस और क्रेडिस सुइस ग्रुप सबसे बड़े हैं और इन दोनों के पास सभी बैंकों की बैलेंस शीट का आधे से ज्यादा बड़ा हिस्सा है। इन्हें नंबर्ड एकाउंट कहते हैं। इस खाते से जुड़ी सारी बातें एकाउंट नंबर के आधार पर होती हैं, कोई नाम नहीं लिए जाते। बैंक में कुछ ही लोग होते हैं जो जानते हैं कि बैंक खाता किसका है।

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