Supreme Court: अदालतों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए गए- दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को उच्च न्यायालय को बताया कि राजधानी की रोहिणी अदालत में 24 सितंबर को हुई गोलीबारी की धटना के बाद यहां सात जिला अदालतों में सुरक्षा बंदोबस्त के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत कक्ष में हुई इस गोलाबारी में तीन व्यक्ति मारे गए थे।पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि एक सुरक्षा ऑडिट किया गया है और यहां सभी सात जिला अदालतों- तीस हजारी, रोहिणी, कड़कड़डूमा, साकेत, पटियाला, द्वारका और राउज एवेन्यू- में और अधिक मेटल डिटेक्टर उपलब्ध कराये गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा उठाए गए बिंदुओं को अदालत के समक्ष दाखिल नहीं किया गया है। न्यायालय ने वकील से इसे रिकॉर्ड में लाने को कहा, ताकि विवरण को अंतिम आदेश में शामिल किया जा सके। पीठ ने कहा कि कई वकील संघों ने अपने सुझाव दिए हैं और कुछ अभी भी बचे हैं। उसने कहा कि यदि कोई अन्य प्रतिवादी सुझाव देना चाहता है, तो उन्हें 29 अक्टूबर से पहले ऐसा करने की अनुमति होगी।

पीठ ने मामले को आठ नवंबर के लिए सूचीबद्ध करते हुए स्पष्ट किया कि सुझाव दाखिल करने के वास्ते अब और समय नहीं दिया जाएगा। इसके बाद वह मामले में अंतिम आदेश पारित करेगा।पुलिस की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय के पिछले आदेश के बाद अदालत परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और वहां अधिक बुनियादी ढांचा और मैनपावर उपलब्ध कराया गया है।उन्होंने कहा कि अदालत परिसरों में 2300 सीसीटीवी कैमरे हैं और 800 और की आवश्यकता है। सभी सात जिला अदालतों में सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई गयी है।

साकेत बार एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं केसी मित्तल और युगांश मित्तल के माध्यम से अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिसमें संबंधित बार द्वारा अग्रेषित वास्तविक दस्तावेजों के आधार पर एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा उच्च न्यायालय और जिला अदालतों के अधिवक्ताओं के लिए एक कॉमन प्रॉक्सिमिटी कार्ड / स्मार्ट कार्ड जारी किया जाना शामिल है।न्यायालय 24 सितम्बर की रोहिणी कोर्ट की गोलीबारी की घटना के परिप्रेक्ष्य में अदालत परिसर में सुरक्षा और संरक्षा से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। पीठ ने पहले केंद्र, दिल्ली सरकार और विभिन्न बार संघों सहित सभी हितधारकों से इस मुद्दे पर अपने सुझाव देने को कहा था, ताकि उन्हें आदेश में शामिल किया जा सके।

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