कभी दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करते थे सुनील डावर, आज MP का नाम देश में कर रहे हैं रोशन

Sunil Dawar

Image source- @yashodhararaje

भोपाल। एक कहावत है ‘जहां चाह, वहां राह’ यानी अगर आप जीवन में कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो पहले उसे पाप्त करने करने के लिए तरीका खोजिए फिर अंत में आप सफल जरूर होंगे। इस कहावत को सच कर दिखाया है। मध्य प्रदेश के सुनील डावर (Sunil Dawar) ने। सुनील कभी अपने घर को चलाने के लिए मजदूरी किया करते थे। लेकिन आज वो एक एथलेटिक्स के चैंपियन हैं। उन्होंने अपने करियर में सात गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्स मेडल जीता है।

खरगोन के रहने वाले हैं सुनील
खरगोन जिले के एक छोटे से गांव टांडा बरूड़ से निकलकर नेशनल चैंपियन बनने की उनकी कहानी बेहद ही प्रेरणादायक है। कभी दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें मजदूरी तक करना पड़ता था। जिस उम्र में बच्चें खेलते और पढ़ते हैं उस 12 साल की उम्र में सुनील डावर खेतों में मजदूरी करते थे। वो दिन में स्कूल जाते और शाम में खेतों में काम करते थे। लगभग तीन सालों तक मजदूरी करने के बाद उनकी किस्मत बदली जब उन्हें स्कूल की एक शिक्षिका प्रीति गुप्ता ने दौड़ने के लिए कहा। दौड़ में सुनील का प्रदर्शन काफी अच्छा था। स्कूल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। इसके बाद उन्हें पहले जिला, संभाग और फिर राज्य स्तर पर खेलनने का मौका मिला।

गोल्ड जीतकर आये थे अकादमी के नजरों में 
2017 में उनका शालेय क्रॉस कंट्री रेस में चयन हुआ। इस रेस में उन्होने स्वर्ण पदक जीता। इस प्रदर्शन के बाद मप्र एथलेटिक्स अकादमी का ध्यान उनकी ओर गया और उन्हें कोच एसके प्रसाद की देखरेख में रखा गया। जहां वो अपनी प्रतिभा को और ज्यादा निखार रहे हैं। सुनील ने यहां रहकर जनवरी में आयोजित हुए तीन दिवसीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीता है। ये कारनामा उन्होंने 1500 मीटर दौड़ को 3 मिनट 18.54 सेकंड में पूरा करके किया है। उन्होंने 1500 मीटर दौड़ स्पर्धा में 2015 में स्थापित रिकॉर्ड तीन मिनट 51.16 सेकंड के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। इस रिकॉर्ड को हैदराबाद में धावक शशिभूषण ने बनाया था। इसके अलावा उन्होंने दूसरा गोल्ड पांच हजार मीटर दौड़ में में जीता है।

एशियन चैंपियनशिप की कर रहे हैं तैयारी
फिलहाल सुनील 2022 में होने वाली एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे हैं। इसके अलावा वो 6 फरवरी से 10 फरवरी तक गवाहाटी में होने वाली जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी खेलने जाएंगे। उनके कोच एसके प्रसाद का मानना है कि जिस तरह से सुनील अपनी क्षमता का उपयोग करते हैं, उससे वो जल्द ही ओलंपिक में भी खेलते हुए नजर आ सकते हैं।

उनके नाम उपलब्धियां
1. 2018 में 15वीं नेशनल यूथ अंडर-18 में तीन किमी वर्ग में स्वर्ण पदक

2. इसके बाद साल 2019 में खेलो इंडिया अंडर-21 में 1500 मीटर वर्ग में कांस्य पदक

3. 2019 में 35वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो स्वर्ण

4. 2019 में 64वें नेशनल स्कूल गेम्स में तीन किमी में स्वर्ण

5. 2019 में 13वें साउथ एशियन गेम्स, काठमांडू में पांच किमी में रजत पदक

6. 2020 में खेलो इंडिया अंडर-21 चैंपियनशिप, गुवाहाटी में 1500 मीटर में स्वर्ण और पांच किमी में रजत

7. जनवरी 2021 में 18वें राष्ट्रीय जूनियर फेडरेशन कप अंडर-20 में 1500 मीटर और पांच किमी वर्ग में स्वर्ण पदक

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