Sukesh Chandrasekhar: एक ऐसे ठग की कहानी, जिसने जेल में रहते हुए लोगों से ठग लिए 200 करोड़ रुपये

sukesh Chandrasekhar

नई दिल्ली। वैसे तो भारत में नटवरलाल समेत कई ऐसे ठग हुए जिनके किस्से कहानियों को लोग बड़े चाव से पढ़ते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ठग की कहानी बताएंगे जो ठगी करने के लिए कभी करूणानिधि का पोता बन जाता तो कभी येदियुरप्पा का सचिव। इतना ही नहीं इस ठग ने जेल में बैठे-बैठ ही 200 करोड़ की वसूली कर डाली और किसी को पता भी नहीं चला।

सभी को एक ही टेक्निक से ठगता है

इस ठग का नाम है सुकेश चंद्रशेखर (sukesh Chandrasekhar)। ठगी की दुनिया में यह एक जाना माना नाम है। उसके खिलाफ ठगी के कई मामले दर्ज हैं। खास बात यह है कि सुकेश लगभग सभी को एक ही तरह से ठगता है। जिस भी व्यक्ति को वो ठगता है उसे पहले यह दिखाता है कि वो किसी मंत्री या प्रभावशाली व्यक्ति से जुडा हुआ है। इसके बाद मीठी-मीठी बातों में फंसा कर लोखों-करोड़ों रूपये लेकर फरार हो जाता है।

17 साल की उम्र से लोगों को ठग रहा है

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुकेश इस काम को महज 17 साल की उम्र से कर रहा है। पहली बार उसने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे का दोस्त होने का नाटक करके 1.14 करोड़ रूपये एक परिवार से ठग लिया था। इस आरोप को लेकर पहली बार उसे बेंगलुरू पुलिस ने साल 2005 में गिरफ्तार किया था। लेकन वो जल्द ही जेल से छूट गया। 2007 के बाद, वो आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में रहने लगा। उसने हैदराबाद के जुबली हिल्स में एक विशाल अपार्टमेंट को किराए पर लिया। साथ ही लग्जरी कारों को भी उसने किराए पर लिया।

अपने आप को राजनेताओं का रिश्तेदार बतात है

उससे जो भी मिलता उसे बताता कि वो कई बड़े राजनेताओं और अन्य हस्तियों का रिश्तेदार है। रिपोर्ट के अनुसार उसने अपने आप को लोगों के सामने एम करूणानिधि के पोते के रूप में , कर्नाटक के पूर्व मंत्री करूणाकर रेड्डी के सहयोगी और बीएस येदियुरप्पा के सचिव के रूप में पेश किया। लोगों के बीच अपना पैठ बनाता गया और उन्हें ठगता गया। साल 2017 में उसे एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया गया। दरअसल, उसने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरन को यह कहकर ठग लिया कि वो पार्टी के दो पत्ते के चुनाव चिन्ह के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देगा। इसके लिए उसने दिनाकरन से पैसे लिए थे।

दिनाकरन से 50 करोड़ का सौदा किया था

दरअसल, जब अन्नाद्रमुक दो धड़े में बंट गया था तब दिनाकरन उसी में से एक धड़े का नेतृत्व कर रहे थे और वो चाहते थे कि उनके धड़े के पास दो पत्ती का चुनाव चिन्ह रहे। ऐसे में सुकेश चंद्रशेखर ने चिन्ह रखने में मदद करने के लिए 50 करोड़ रूपये का सौदा किया था। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से कथित तौर पर 1.3 करोड़ रूपये की राशि जब्त भी की गई थी। उसके बाद उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया।

जेल से 200 करोड़ रूपये की वसूली

हालांकि, उसकी आपराधिक गतिविधियां यहां भी नहीं रूकी। उसने जेल से भी लोगों को ठगना जारी रखा। एक रिपोर्ट के अनुसार उसने जेल से 200 करोड़ रूपये की वसूली की , ये जेल में बंद किसी भी आरोपी द्वारा अब तक की सबसे अधिक वसूली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसके खिलाफ 200 करोड़ रुपये की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, रंगदारी आदि की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

ईडी ने माना है कि जेल में बंद होने के बावजूद सुकेश चंद्रशेखर (sukesh Chandrasekhar) ने लोगों को ठगना बंद नहीं किया है। सुकेश अब लोगों को ठगने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करता है और स्पूफ कॉल के जरिए लोगों को फोन मिलाता है।

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