Success Story: सफलता के मुकाम पर हैं डोसा प्लाजा के मालिक प्रेम गणपति, कभी धोते थे बर्तन

Success Story: हम बात कर रहे हैं ,डोसा प्लाजा के मालिक प्रेम गणपति का. एक समय था जब वो आर्थिक परेशानियों से घिरे हुए थे.

Success Story: सफलता के मुकाम पर हैं डोसा प्लाजा के मालिक प्रेम गणपति, कभी धोते थे बर्तन

Success Story: कहते हैं कोई भी काम छोटा नहीं होता. अगर पूरी मेहनत और लगन से काम किया जाए तो किसी भी फील्ड में सफलता हासिल की जा सकती है. आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी पैसा कमाने के लिए बर्तन धोने को मजबूर थे. लेकिन आज उनका देश के साथ विदेशों में भी नाम है.

हम बात कर रहे हैं ,डोसा प्लाजा के मालिक प्रेम गणपति का. एक समय था जब वो आर्थिक परेशानियों से घिरे हुए थे. वे एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे. बता दें की डोसा प्लाजा के मालिक प्रेम गणपति ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अपनी जिंदगी बदल ली है.

जानिए प्रेम गणपति की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ी

तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के नागलपुरम के एक गरीब परिवार में जन्मे प्रेम गणपति पढ़ना तो चाहते थे लेकिन उनका ये सपना 10वीं तक ही जिंदा रह पाया. गरीबी की कड़ी मार झेल रहे परिवार की चिंता में इनके पढ़ने के सपने का गला घोंट दिया.

माता-पिता और सात भाई-बहनों का पेट भरने के लिए प्रेम को पढ़ाई छोड़ कर कमाई की तलाश में निकलना पड़ा. छोटी सी उम्र में ही वह स्कूल जाने की बजाए दुकानों में काम करने के लिए जाने लगे.

काम की तलाश में आए मुंबई

प्रेम गणपति अपने एक दोस्त के साथ मुंबई आ गए थे. दोस्त ने प्रेम को 1200 रुपये की नौकरी दिलाने का वादा किया था, लेकिन बांद्रा रेलवे स्टेशन पर वही दोस्त उन्हें धोखा देकर उनके पैसे ले उड़ा. प्रेम के साथ दिक्कत ये थी कि यहां कोई उनका परिचित भी नहीं था और वो मुंबई की भाषा से भी अनजान थे. मजबूरी में इस शख्स को ढाबे पर काम करना पड़ा, क्योंकि वापस घर जाने का सवाल ही नहीं उठता था.

150 रुपये वेतन पर बर्तन मांजे

अब जैसे तैसे उन्हें अपना पेट पालना ही था, इसी वजह से उन्होंने अगले ही दिन माहिम स्थित एक बेकरी में काम करना शुरू कर दिया. यहां उन्हें बर्तन धोने थे, जिसके बदले उन्हें 150 रुपये प्रति माह मिलनी तय हुई

प्रेम के लिए तमिलनाडु से होना एक वरदान साबित हुआ क्योंकि इस वजह से उन्हें डोसा बनाने का शौक था और यही शौक आगे चलकर उनकी कामयाबी का कारण बना.

जन्म हुआ डोसा प्लाजा का

1997 में उन्होंने 5000 रुपये प्रतिमाह की दुकान किराये पर ली और 2 लोगों को नौकरी पर रखा. उनकी इस दुकान का नाम था - प्रेम सागर डोसा प्लाज़ा. उनकी इस दुकान पर कई सारे स्टूडेंट्स आते थे, प्रेम की उनसे अच्छी दोस्ती हो गयी थी.

प्रेम ने इन स्टूडेंट्स से लैपटॉप चलाना सीखा और इंटरनेट पर डोसे की कई सारी रेसिपीज़ सीखी. जल्द ही प्रेम ने 20 तरह के डोसे अपने कस्टमर्स को खिलाये.

2002 तक आते आते डोसा प्लाज़ा का प्रतिमाह का टर्नओवर 10 लाख रुपये हो गया.

2005 तक प्रेम ने 104 तरह के डोसे लांच कर दिए और 27 डोसे का इनका ट्रेडमार्क है. आज पुरे भारत में इनके 45 आउटलेट्स हैं. आज ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी इनके 5 आउटलेट हैं.

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