Drone Farming: ड्रोन से 1 एकड़ में कीटनाशक का छिड़काव 7 मिनट में, नई तकनीक से बचेगा किसानों का पैसा

Drone Farming: बस्तर में अब भी आमतौर पर हल-बल से ही किसान खेती-किसानी कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई हेलिकाप्टर या ड्रोन से खेतों में यूरिया

Drone Farming: ड्रोन से 1 एकड़ में कीटनाशक का छिड़काव 7 मिनट में, नई तकनीक से बचेगा किसानों का पैसा

जगदलपुर।Drone Farming: बस्तर में अब भी आमतौर पर हल-बल से ही किसान खेती-किसानी कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई हेलिकाप्टर या ड्रोन से खेतों में यूरिया और कीटनाशक के छिड़काव की बात करें तो अचरज स्वाभाविक है।

ड्रोन से नैनो यूरिया का दिया डेमोंस्ट्रेशन

बस्तर ब्लॉक के कोलचूर गांव में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और कीटनाशक के छिड़काव का डेमोंस्ट्रेशन दिया गया। कृषि कार्य के लिए कम समय एवं लागत में घुलनशील रसायन एवं कीटनाशकों का छिड़काव इससे संभव है। इस नई तकनीक की जानकारी किसानों को दी जा रही है। छत्तीसगढ़ में यह पहला प्रयोग है, लिहाजा अंचल के किसानों में इसे लेकर उत्साह के भी नजर आ रहा है।

कम लागत में फसल की बेहतर पैदावार

किसानों को अवगत कराया जा रहा है कि ड्रोन से बेहतर दक्षता के साथ भूमि के बड़े रकबे में जल्दी और कुशलता से नैनो यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। इसका सार्थक लाभ यह होता है कि किसान कम लागत में फसल की बेहतर पैदावार ले पाएंगे। जीपीएस प्रणाली से लैस ड्रोन खेत के उन क्षेत्रों को पहचान करके लागत कम करने में मदद कर सकते हैं, जिन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

3 से 7 मिनट के भीतर यह छिड़काव पूरा

किसानों को खेत में छिड़काव करने के लिए अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। इसके साथ ही कीटनाशकों और अन्य रसायनों का उपयोग कम करने में भी ये मददगार साबित होंगे। किसानों को 300 रुपए प्रति एकड़ के मान से यह उपलब्ध करवाया जाएगा। एक एकड़ में 3 से 7 मिनट के भीतर यह छिड़काव पूरा कर लेता है।

हेलिकॉप्टर से होगी खेती

बस्तर में पहली बार हेलिकॉप्टर के जरिए किसानी करने का ऐलान किया है। कोंडागांव के उन्नत कृषक राजाराम त्रिपाठी कहते हैं कि वे हेलिकॉप्टर बुक कर चुके हैं। जल्द ही वे इसकी मदद किसानी के लिए लेने वाले हैं। औषधीय पौधों की ऑर्गेनिक खेती में विशेष पहचान बना चुके इलाके के किसान डॉ राजाराम त्रिपाठी कैलिफोर्निया की एक कंपनी से हेलिकॉप्टर खरीदी के लिए अनुबंध कर चुके हैं।

राजाराम त्रिपाठी कर रहे आर्गेनिक खेती

डॉ त्रिपाठी कहते हैं कि सैर-सपाटा के लिए उपयोग करने के साथ ही वे खेती-किसानी में भी इसका उपयोग करेंगे। कोंडागांव में लगभग 1100 एकड़ रकबे में वे पिछले कुछ सालों से औषधीय पौधों की आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि वे यूरोपीय देशों में हेलिकॉप्टर से खेती करने का तौर-तरीका देखने के साथ ही इसे समझ भी चुके हैं।

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