Hinduja Group: नहीं रहे हिंदुजा समूह के अध्यक्ष एसपी हिंदुजा, 87 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

चार हिंदुजा भाइयों में सबसे बड़े और हिंदुजा समूह के अध्यक्ष एसपी हिंदुजा का बुधवार को निधन हो गया है............

Hinduja Group: नहीं रहे हिंदुजा समूह के अध्यक्ष एसपी हिंदुजा, 87 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

Hinduja Group: चार हिंदुजा भाइयों में सबसे बड़े और हिंदुजा समूह के अध्यक्ष एसपी हिंदुजा का बुधवार को निधन हो गया है। एसपी हिंदुजा ने 87 साल की उम्र में यूनाइटेड किंगडम के लंदन में आखिरी सांस ली। परिवार के प्रवक्ता ने उनके निधन की पुष्टि की है। बता दें कि एसपी हिंदुजा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

हिंदुजा परिवार ने निधन की जानकारी देते हुए कहा, "गोपीचंद, प्रकाश, अशोक और पूरे हिंदुजा परिवार को आज हमारे परिवार के संरक्षक और हिंदुजा समूह के अध्यक्ष श्री एस पी हिंदुजा के निधन की घोषणा करते हुए भारी दुख हो रहा है।"

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साल 1914 में हुई थी ग्रुप की स्‍थापना

बता दें कि हिंदुजा ग्रुप की स्‍थापना साल 1914 में श्रीचंद परमानंद ने की थी। उनके निधन के बाद बेटे कारोबार को चला रहे है। श्रीचंद परमानंद के चार बेटे हैं। बड़े बेटे एस पी हिंदुजा के अलावा बाकी के तीन भाईयों के नाम- जीपी हिंदुजा, प्रकाश हिंदुजा और अशोक हिंदुजा।वहीं बताते चलें कि ग्रुप का बिजनेश दुनियाभर के 38 देशों में फैला हुआ है। हिंदुजा ग्रुप की कंपनियों में ऑटो कंपनी अशोक लीलैंड और इंडसइंड जैसे बड़े ब्रांड शामिल है। इसके अलावा हिंदुजा ग्रुप बैंकिंग, केमिकल्स, पावर, मीडिया और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कारोबार करता है।

पाकिस्तान में जन्में थे एसपी हिंदुजा

बता दें कि श्रीचंद पी हिंदुजा को एसपी नाम से भी जाना जाता था। वह हिंदुजा समूह के फाउंडर पीडी हिंदुजा के सबसे बड़े बेटे थे। 1935 में उनका जन्म पाकिस्तान के कराची  हुआ था। 1952 में अपनी शिक्षा पूरी करते ही वह 18 साल की उम्र से ही अपने पिता के कारोबार के साथ जुड़ गए। बाद में उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता ले ली और वहीं लंदन में ही रहने लगे। उनकी शादी मधु हिंदुजा से हुई थी, जिनकी हाल ही में मौत हुई थी।

बोफोर्स घोटाले में कमीशन लेने का लगा था आरोप

हिंदुजा परिवार के संरक्षक और उनके भाइयों, गोपीचंद और प्रकाश पर अवैध कमीशन के रूप में लगभग SEK 81 मिलियन मिलने का आरोप लगाया गया था ताकि स्वीडिश गनमेकर एबी बोफोर्स को भारत सरकार का अनुबंध हासिल करने में मदद मिल सके। हालांकि  कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

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